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उत्तर प्रदेश के शहराें में नहीं मिल रही जमीन, थम रही है साइंस पार्क योजना की रफ्तार

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महत्वाकांक्षी साइंस पार्क योजना  



राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ: प्रदेश में बच्चों और युवाओं में वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और नवाचार को बढ़ावा देने की महत्वाकांक्षी साइंस पार्क योजना जमीन की कमी के कारण गति नहीं पकड़ पा रही है।

उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की ओर से प्रदेश के हर मंडल में साइंस पार्क स्थापित करने की योजना बनाई गई है, लेकिन कई जिलों में उपयुक्त भूमि उपलब्ध न होने से परियोजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है। इसका सीधा असर विद्यार्थियों को मिलने वाले विज्ञान आधारित सीख और प्रयोगात्मक अवसरों पर पड़ रहा है।

परिषद वर्तमान में गाजियाबाद में साइंस पार्क का सफल संचालन कर रही है। यहां बच्चों के लिए विज्ञान को रोचक तरीके से समझाने, प्रयोगों और माडलों के माध्यम से सीखने तथा नवाचार को प्रोत्साहित करने की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसी माडल पर अन्य मंडलों में भी साइंस पार्क विकसित किए जाने हैं, ताकि शहरी के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थी भी इसका लाभ उठा सकें।

साइंस पार्क के लिए न्यूनतम एक एकड़ और अधिकतम पांच एकड़ भूमि की आवश्यकता है। भूमि की उपलब्धता के अनुसार हर मंडल में अलग-अलग स्वरूप के साइंस पार्क विकसित किए जाने हैं। इन पार्कों में विज्ञान से जुड़े प्रयोग, माडल, विज्ञान खेल, तारामंडल और आधुनिक तकनीकों से परिचित कराने की व्यवस्थाएं प्रस्तावित हैं।

परिषद के प्रवक्ता एवं वैज्ञानिक अधिकारी डा सुमित कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, साइंस पार्क के लिए परिषद को निश्शुल्क भूमि की आवश्यकता है, जिसे जिला प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराया जाना है। भूमि शहर के निकट होनी चाहिए, ताकि बच्चों की पहुंच आसान हो सके। गोरखपुर में भूमि उपलब्ध होने के बाद साइंस पार्क का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है।

वहीं आगरा में भी निर्माण प्रगति पर है। इन दोनों स्थानों पर इस वर्ष के अंत तक कार्य पूरा होने की उम्मीद है। इसके अलावा वाराणसी, मुजफ्फरनगर, झांसी, बरेली और मुरादाबाद में साइंस पार्क के लिए उपयुक्त भूमि की तलाश जारी है। अन्य मंडलों में भी जमीन को लेकर प्रक्रिया चल रही है।  
बांदा में बुंदेलखंड का पहला साइंस पार्क

बुंदेलखंड क्षेत्र में पहला साइंस पार्क बांदा के कांशीराम पार्क में विकसित किया जाएगा। इसके लिए 17 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। इस परियोजना पर लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत आएगी। जिला विज्ञान केंद्र के प्रभारी शनि कुमार के अनुसार इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) शासन स्तर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के पास विचाराधीन है।
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