रक्सौल एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने की कवायद (AI Image)
जागरण संवाददाता, रक्सौल (पूर्वी चंपारण)। भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र स्थित रक्सौल एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर का एयरपोर्ट बनाए जाने की दिशा में कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। भूमि अधिग्रहण एवं जिर्णोद्धार (आधुनिकीकरण) से जुड़ी प्रक्रिया को गति देने के लिए प्रशासन ने अधिग्रहित भूमि के मुआवजा भुगतान की तैयारी शुरू कर दी है। इसकी जानकारी स्थानीय प्रशासन ने दी है।
प्रशासन के अनुसार, यह एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसके तहत एयरपोर्ट का व्यापक विस्तार और आधुनिकीकरण किया जाएगा। सामरिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण इस एयरपोर्ट के विकसित होने से न केवल पूर्वी चंपारण बल्कि सीमावर्ती नेपाल के लोगों का भी भारत के विभिन्न प्रदेशों से सीधा संपर्क स्थापित होगा। इससे व्यापार, पर्यटन और आवागमन को नई मजबूती मिलेगी।
एयरपोर्ट विस्तार के लिए कुल 139 एकड़ भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गई है। संबंधित भू-स्वामियों को शीघ्र ही मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। भूमि अधिग्रहण पूर्ण होते ही रनवे निर्माण का कार्य आरंभ कर दिया जाएगा। इस परियोजना का विस्तृत लेआउट तैयार कर लिया गया है।
उड़ान विभाग के सचिव नीलेश देवड़े ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए एयरपोर्ट का नक्शा भी सार्वजनिक किया है। नक्शे के अनुसार, रक्सौल एयरपोर्ट का नया रनवे 2360 मीटर लंबा होगा, जो वर्तमान रनवे से लगभग 1000 मीटर अधिक है। यह रनवे तिलावे नदी से लगभग 500 मीटर पश्चिम, सिसवा गांव के पास तक विस्तारित किया जाएगा।
नए रनवे के निर्माण के बाद रक्सौल एयरपोर्ट पर बड़े व्यावसायिक विमानों की लैंडिंग संभव हो सकेगी। एयरबस-320 और बोइंग-737 जैसे कमर्शियल विमान यहां आसानी से उतर सकेंगे। वहीं, सामरिक महत्व को देखते हुए भारतीय वायुसेना के तेजस, राफेल, मिराज, जगुआर और मिग-29 जैसे फाइटर जेट्स का संचालन भी यहां से किया जा सकेगा।
गौरतलब है कि पूर्व में यह एयरपोर्ट 213 एकड़ भूमि पर निर्मित था। अब 139 एकड़ अतिरिक्त भूमि जुड़ने से कुल क्षेत्रफल में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे एक अत्याधुनिक एयरपोर्ट के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है। प्रस्तावित सुविधाओं में विस्तृत पार्किंग व्यवस्था, एयरपोर्ट कॉलोनी, आधुनिक टर्मिनल भवन तथा अन्य आधारभूत संरचनाएं शामिल हैं।
रक्सौल एयरपोर्ट के विकसित होने से न केवल पूर्वी चंपारण बल्कि पूरे उत्तर बिहार के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही भारत-नेपाल सीमा से सटे इस क्षेत्र की सामरिक और आर्थिक अहमियत भी और अधिक सुदृढ़ होगी। |
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