मेले में सज गईं दुकानें, आकर्षण का केंद्र बने विभिन्न प्रकार के झूले। जागरण
संवाद सूत्र, मगहर। सद्गुरु कबीर की निर्वाण स्थली मगहर स्थित कबीर चौरा परिसर में मकर संक्रांति (खिचड़ी) पर्व के अवसर पर लगने वाले परंपरागत मेले की तैयारियां पूरी हो गई हैं। मेले में खजला, बिसात, खिलौने, मिठाई की दुकानों के साथ ही मनाेरंजन के लिए झूले सज गए हैं। वहीं कबीर साहब की समाधि और मजार के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का आगमन भी बढ़ने लगा है। 14 और 15 जनवरी को कबीर की समाधि पर खिचड़ी चढ़ाई जाएगी। इसके लिए कबीर पंथी एक दिन पहले ही पहुंचने लगे।
सनातन परंपरा के अनुसार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मकर संक्रांति (खिचड़ी) पर्व मनाया जाता है। इसके साथ ही धार्मिक व वैवाहिक आयोजनों का शुभारंभ होता है। प्रत्येक वर्ष देश-प्रदेश से आने वाले श्रद्धालु कबीर साहब की समाधि पर आस्था की खिचड़ी चढ़ाते हैं। कबीर चौरा मठ के महंत विचार दास ने बताया कि हरियाणा के बहादुरगढ़, रेवाड़ी, रोहतक, चंडीगढ़, पंजाब, समस्तीपुर (बिहार), कुशीनगर, कौड़ीराम (गोरखपुर), बलरामपुर, गोंडा सहित विभिन्न जनपदों से कबीर साहब के अनुयायी मगहर पहुंचने लगे हैं।
हरियाणा के कबीर आश्रम दिदौली, रेवाड़ी से आए महंत विक्रम दास साहेब ने बताया कि वह पिछले लगभग 15 वर्षों से खिचड़ी पर्व पर मगहर आ रहे हैं। बुधवार को संत समाज द्वारा विधि-विधान से खिचड़ी चढ़ाई जाएगी। रोहतक (हरियाणा) से आए संत रामलाल दास ने कहा कि सद्गुरु कबीर साहब की स्थली पर पहुंचकर असीम शांति की अनुभूति होती है। वहीं कबीर आश्रम खेड़ी, रेवाड़ी के संत सुब्बे सिंह ने कहा कि कबीर साहब सादा जीवन और सरल आहार का संदेश देते थे। खिचड़ी चढ़ाने के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा।
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नजफगढ़, दिल्ली से आए संत मुंशीदास ने कहा कि सद्गुरु कबीर साहब ने प्रेम और सौहार्द का मार्ग दिखाया। यहां खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा आपसी भेदभाव मिटाने और समानता का संदेश देती है। मेले को लेकर कबीर चौरा परिसर में रौनक बढ़ गई है। परंपरागत दुकानों के साथ बच्चों के मनोरंजन के लिए विभिन्न प्रकार के झूले भी लगाए जा रहे हैं। |