सदर थाना पुलिस की हिरासत में आरोपित
जागरण संवाददाता, सहारनपुर। सदर बाजार थाना पुलिस ने यूपी समेत मुंबई और सहारनपुर में फर्जी फर्म बनाकर 25 करोड़ की जीएसटी चोरी करने के मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। लोगों के आधार कार्ड और पैन कार्ड लेकर आरोपित फर्जी फर्म बनाते थे।
इस तरह आरोपितों ने फर्जी फर्म बनाकर 25 करोड़ की जीएसटी चोरी की। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से सात मोबाइल, एक पैन कार्ड, चैक बुक और लैपटाप बरामद किया है। आरोपितों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेजा गया। गिरोह के बाकी साथियों को गिरफ्तार करने में पुलिस दबिश दे रही है। पुलिस यह भी डाटा जुटा रही है कि अब तक कितने लोगों के पैन और आधार कार्ड लेकर फर्जी फर्म बनाई गई है।
एएसपी मनोज कुमार ने पुलिस लाइन स्थित सभागार में प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि 27 अगस्त 2025 को जीएसटी विभाग के राज्य कर अधिकारी परितोष कुमार मिश्रा ने सदर बाजार थाने में तहरीर दी थी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने शौर्य फर्म बनाकर 25 करोड़ रुपये के लेनदेन कर जीएसटी चोरी करने वाले अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया किया था।
आरोपितों ने दिल्ली, मुंबई, यूपी और सहारनपुर में कई फर्जी फर्म बनाकर करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी की थी। पुलिस की जांच में चार आरोपितों के नाम सामने आए थे। जिनमें साहिबाबाद के शालीमार गार्डन निवासी मोहम्मद शादाद और दिल्ली के शाहदार के विलेज खेडा निवासी मोहम्मद आलम पुत्र मोहम्म्द रफीक निवासी को शालीमार गार्डन से गिरफ्तार किया है।
सात मोबाइल फोन, एक चेक बुक, एक पेनकार्ड और एक लैपटॉप बरामद
इनके पास सात मोबाइल फोन, एक चेक बुक, एक पेनकार्ड, एक लैपटॉप बरामद हुआ है। आरोपियों के दो अन्य साथियों की पुलिस तलाश कर रही है। आरोपित मोहम्मद आलम ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वर्ष 2018 की ट्रेनिंग की थी। उसके बाद करोल बाग में कपड़े की दुकान पर वर्ष 2022 तक कार्य किया था।
वर्ष 2023 में उसकी मुलाकात मेरठ में आरटीओ दफ्तर के पास रहने वाले मोहसीन सैफी से हुई। जो कि मुस्तफाबाद जमुना विहार में रहता था। दोनों ने मोहसीन की फर्माें का बिलिंग कार्य शुरू किया था। बिलिंग कार्य के लिए मोहसीन शुरूआत में 25 हजार देता था। मोहसीन की बोगस फर्में ज्यादा थी।
बाद में दोनों ने बिलिंग का कार्य छोड़कर मोहसीन की सभी बोगस फर्माें की जीएसटी आर-1, 3 बी रिटर्न का कार्य करने लगे थे। बिलिंग करने वाले अकाउंटेंट मोहसीन की बोगस फर्माें की बिलिंग कर उनका डेटा शादाब के व्हाटसएप पर भेज देते थे।
जीएसटी आर-1, 3 बी रिटर्न दाखिल होने के बाद फर्म की पीडीएफ फाइल शादाब के जरिए मोहसिन को भेजी जाती थी। आरोपित ने बताया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए बोगस फर्मे रजिस्टर्ड की गई थी। जिनके दस्तावेजों को गाजियाबाद के टीला मोड निवासी आलम के पास रखा गया था।
शादाब के एक बोगस फर्म बनाने के लिए दस हजार रुपये लेता था। आरोपितों के खिलाफ विभिन्न थानों में करीब दस मुकदमे दर्ज है। लखनऊ मुख्यालय से भी जांच की जा रही है।
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