इंदौर में दूषित पानी से मौत (प्रतीकात्मक चित्र)
डिजिटल डेस्क, इंदौर। देश के स्वच्छतम शहर के तमगे से पहचाने जाने वाले इंदौर में दूषित पानी से फैल रही बीमारी ने एक और जान ले ली है। भागीरथपुरा निवासी, रिटायर्ड शिक्षक और कांग्रेस के वार्ड अध्यक्ष राजाराम बौरासी (75) की रविवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके साथ ही शहर में दूषित पानी से जुड़ी मौतों का आंकड़ा 28 तक पहुंच गया है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अचानक बिगड़ी तबीयत, इलाज के दौरान मौत
परिजनों के मुताबिक, शुक्रवार को राजाराम बौरासी को अचानक उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी। पहले स्थानीय डॉक्टर को दिखाया गया, लेकिन राहत नहीं मिली। हालत बिगड़ने पर शनिवार सुबह उन्हें सरकारी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां रविवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
स्वास्थ्य विभाग का अलग पक्ष
इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने अलग दावा किया है। विभाग के अनुसार, राजाराम बौरासी पहले से हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज से पीड़ित थे। अधिकारियों ने वर्ष 2018-19 की एंजियोग्राफी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उपलब्ध चिकित्सकीय दस्तावेजों में उल्टी-दस्त की स्पष्ट पुष्टि नहीं होती। हालांकि, परिजन इस दावे से असहमत हैं।
अस्पतालों में अब भी मरीज भर्ती
दूषित पानी से बीमार पड़े लोगों का इलाज अब भी जारी है। फिलहाल 10 मरीज सरकारी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से 4 मरीज आईसीयू में हैं। इनमें एक महिला और एक पुरुष की हालत गंभीर बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है और टीमें लगातार सर्वे कर रही हैं।
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दो दिन में दो मौतों से बढ़ी दहशत
इससे पहले शुक्रवार को 63 वर्षीय बद्री प्रसाद की मौत हुई थी। उन्हें 4 जनवरी को उल्टी-दस्त की शिकायत पर एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चार दिन बाद छुट्टी मिलने के बाद 17 जनवरी को हालत बिगड़ने पर उन्हें अरबिंदो अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।
वहीं, गुरुवार रात 82 वर्षीय विद्या बाई की भी अरबिंदो अस्पताल में मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, उन्हें लंबे समय से उल्टी-दस्त की शिकायत थी और गिरने से कूल्हे की हड्डी टूट गई थी। |