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शक्सगाम घाटी पर चीन के अवैध दावे को भारत ने किया खारिज, क्या है विवाद की असली वजह?

Chikheang 2 hour(s) ago views 438
  

शक्सगाम घाटी विवाद की असल वजह। (एक्स)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चीन ने जम्मू-कश्मीर में शक्सगाम घाटी पर अपने बेबुनियाद नक्शे वाले दावों को दोहराकर एक बार फिर भारत के साथ तनाव बढ़ा दिया है। यह उकसाना भारत की ओर से शक्सगाम घाटी में चीनी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की आलोचना के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि भारत अपने हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का अधिकार रखता है, क्योंकि यह भारतीय क्षेत्र है।

चीन के शिनजियांग प्रांत की सीमा से लगे एक संवेदनशील ऊंचाई पर मौजूद शक्सगाम घाटी या ट्रांस काराकोरम ट्रैक्ट, काराकोरम रेंज के उत्तर में , विवादित सियाचिन/ अक्साई चिन क्षेत्र के पास स्थित है। यह गुलाम कश्मीर के हुंजा-गिलगित क्षेत्र का हिस्सा है।

पाकिस्तान ने 1963 में चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते के तहत, अपने अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में शक्सगाम घाटी में भारत का 5,180 वर्ग किलोमीटर चीन को अवैध रूप से सौंप दिया था। भारत ने इस कार्रवाई को गैर-कानूनी और नजायज बताते हुए दृढ़ता से खारिज किया है और इस क्षेत्र पर अपने दावे पर जोर दिया है।
चीन का दावा

जब शक्सगाम पर भारत के रुख के बारे में पूछा गया तो चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, “सबसे पहले, जिस क्षेत्र का आप जिक्र कर रहे हैं, चीन का क्षेत्र है।“ भारत की आलोचना पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि अपने क्षेत्र में चीन इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियां कर रहा है।

पाकिस्तान के साथ अपने अवैध समझौते का जिक्र करते हुए, माओ ने दावा किया कि चीन और पाकिस्तान ने 1960 के दशक में एक सीमा समझौता किया है और दोनों देशों के बीच सीमा तय की है।

इस्लामाबाद के साथ अपने अवैध समझौते का जिक्र करते हुए, माओ ने दावा किया कि चीन और पाकिस्तान ने 1960 के दशक से एक सीमा समझौता किया है और दोनों देशों के बीच सीमा तय की है।
भारत का रुख

भारत ने शुक्रवार को शक्सगाम घाटी में चीन के इंफ्रास्ट्रक्चर के काम को खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “शक्सगाम घाटी भारतीय इलाका है। हमने 1963 में हुए तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं दी है। हमने लगातार यह कहा है कि यह समझौता गैर-कानूनी और अमान्य है।“

  

उन्होंने कहा, “हम तथाकथित चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर को भी मान्यता नहीं देता है, जो भारतीय इलाके से होकर गुजरता है, जिस पर पाकिस्तान ने जबरदस्ती और गैर-कानूनी कब्जा किया हुआ है।“

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग हैं। हमने यह बात पाकिस्तान और चीन को लगातार बताई है।

उन्होंने आगे कहा कि जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न अंग हैं, और नई दिल्ली ने लगातार यह बात चीन और पाकिस्तान दोनों को बताई है।
शक्सगाम घाटी में चीन में चीन की अवैध गतिविधियां

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने शक्सगाम से होकर एक ऑल-वेदर सड़क का निर्माण शुरू कर दिया है, जबकि भारत ने इस इलाके में चीनी गतिविधियों पर लगातार आपत्ति जताई है। भूटान के डोकलाम में 2017 के गतिरोध के बाद शक्सगाम में बीजिंग की निर्माण गतिविधियों में तेजी आई है।

  

कहा जा रहा है कि नई सड़क दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर से 49 किलोमीटर से भी कम दूरी पर है, और इससे इस इलाके में भारत की रक्षा स्थिति पर कोई असर पड़ने की संभावना नहीं है।

2021 में, साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने रिपोर्ट किया था कि पाकिस्तान चीन के साथ नए जमीनी सीमा क्रॉसिंग बनाने की सोच रहा था, जिससे लद्दाख और बाकी कश्मीर में भारतीय सेनाओं के खिलाफ उनकी सैन्य इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ावा मिल सकता था।

यह भी पढ़ें- कहां है शक्सगाम घाटी, जिसे लेकर भारत-चीन में ठनी? 63 साल पहले हुए ना\“पाक\“ समझौते का पूरा सच
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