संवाद सहयोगी, कलेर (अरवल)। ज्ञान, विद्या, कला और सृजन की देवी मां सरस्वती को समर्पित बसंत पंचमी इस वर्ष 23 जनवरी को अत्यंत शुभ योगों के साथ मनाई जाएगी। इस पावन तिथि पर पूर्वभाद्र और उत्तरभाद्र नक्षत्र के युग्म संयोग, साथ ही परिघ और शिव योग का निर्माण हो रहा है।
इसके अलावा, रवियोग का उत्तम संयोग दिनभर बना रहेगा, जिससे मां सरस्वती की पूजा-अर्चना विशेष फलदायी मानी जा रही है। श्रद्धालु इस दिन ज्ञानार्जन, आत्मिक प्रबोधन और अज्ञानता के नाश के लिए विधि-विधान से पूजा करेंगे।
ज्योतिषाचार्य आचार्य हर्ष मिश्रा के अनुसार, बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त कहा जाता है। इस दिन बिना विशेष मुहूर्त देखे विवाह, गृह प्रवेश, नौकरी या व्यापार की शुरुआत, भूमिपूजन, वाहन व विशेष वस्तुओं की खरीदारी जैसे सभी शुभ एवं मांगलिक कार्य अत्यंत शुभ और फलदायी माने जाते हैं।
जीवन के नए अध्याय की शुरुआत के लिए यह दिन श्रेष्ठ माना गया है। बसंत पंचमी के दिन ज्ञान की देवी के साथ-साथ कामना, सृजन और प्रेम के देवता कामदेव की भी पूजा की परंपरा है।
मान्यता है कि इस दिन की आराधना से जीवन में प्रेम, सौहार्द और रचनात्मक ऊर्जा का संचार होता है। गायन, वादन, नृत्य, लेखन सहित सभी कलाओं से जुड़े साधकों के लिए बसंत पंचमी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती की आराधना करने से कला, रचनात्मकता और ख्याति में वृद्धि होती है तथा साधक को सफलता प्राप्त होती है।
इसी दिन सृष्टि में पहली बार ध्वनि का संचार हुआ था। वहीं, रामचरितमानस के अनुसार शबरी और प्रभु श्रीराम का मिलन भी बसंत पंचमी को हुआ था। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, यदि कुंडली में बृहस्पति नीच स्थिति में हों तो बसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु और मां सरस्वती की पूजा करना लाभकारी होता है।
इस दिन पीले वस्त्र, पीले फूल, पीला चंदन, पीले फल आदि का उपयोग और दान करने से गुरु ग्रह बलिष्ठ होता है। साथ ही कुंडली के छठे, सातवें और बारहवें भाव को पुष्ट करने के लिए यह दिन अत्यंत उत्तम माना गया है।
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