बोड़ाम में काड़ा लड़ाई में बिफरे भैंसे ने ली पिता की जान, बेटा जिंदगी और मौत के बीच।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। बोड़ाम थाना क्षेत्र के बेलडीह पंचायत स्थित जोबा गांव में सोमवार को मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में आयोजित पारंपरिक काड़ा (भैंसा) लड़ाई प्रतियोगिता एक भयानक त्रासदी में बदल गई।
मैदान में दो ताकतवर भैंसों की भिड़ंत के दौरान एक उग्र भैंसा अनियंत्रित होकर दर्शक दीर्घा की ओर दौड़ पड़ा। भागने की आपाधापी में भैंसे ने वहां खड़े एक पिता को अपने सींगों पर उठाकर जमीन पर पटक दिया।
उनके नाबालिग बेटे को भी बुरी तरह रौंद डाला। इस दर्दनाक हादसे में पिता की मौत हो गई, जबकि पुत्र की हालत गंभीर बनी हुई है।
मैदान के बाहर मौत का तांडव
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जोबा गांव के फुटबाल मैदान में युवा कमेटी द्वारा काड़ा लड़ाई का आयोजन किया गया था। दोपहर करीब एक बजे दो भैंसों के बीच रोमांचक मुकाबला चल रहा था। हारता देख एक भैंसा जान बचाकर मैदान के बाहर की ओर भागा।
दुर्भाग्यवश, वहां खड़े जोबा निवासी 55 वर्षीय सुभाष कर्मकार उसकी चपेट में आ गए। भैंसे ने सुभाष को सींग से हवा में उछाल दिया। पिता को बचाने की कोशिश में उनका 15 वर्षीय पुत्र सागर कर्मकार भी गंभीर रूप से घायल हो गया।
इलाज के दौरान उजड़ गया परिवार
खून से लथपथ पिता-पुत्र को स्थानीय लोगों की मदद से आनन-फानन में एमजीएम मेडिकल कालेज अस्पताल ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने सुभाष कर्मकार को मृत घोषित कर दिया।
वहीं, सागर के पैर की हड्डी टूट गई है और वह गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। त्योहार के दिन हुई इस घटना से कर्मकार परिवार में कोहराम मच गया है।
हादसे के बाद भी जारी रहा खेल
मानवता को शर्मसार करने वाली बात यह रही कि इतना बड़ा हादसा होने के बावजूद आयोजकों ने खेल नहीं रोका और दो और जोड़ों की लड़ाई करवाई।
सूचना मिलते ही बोड़ाम पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुंची और सख्ती दिखाते हुए मेला बंद करवाया। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है।
गौरतलब है कि ऐसे हिंसक पशु खेलों पर कानूनी प्रतिबंध के बावजूद ग्रामीण इलाकों में इनका आयोजन जारी है, जो अब जानलेवा साबित हो रहा है। |
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