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हिमाचल सरकार का बड़ा निर्णय, पद रिक्त तो किसी भी कॉलेज में लग सकती है पढ़ाने की ड्यूटी; 14 से 16 घंटे पढ़ाना अनिवार्य

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हिमाचल प्रदेश सरकार ने कॉलेज शिक्षकों को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। प्रतीकात्मक फोटो  



अनिल ठाकुर, शिमला। तकनीकी शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए हिमाचल सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। सरकारी इंजीनियरिंग कालेजों में फैकल्टी के बेहतर उपयोग के लिए ‘फंक्शनल इक्विवेलेंस माडल’ लागू कर दिया है। इंजीनियरिंग कालेजों में एप्लाइड साइंस व ह्यूमेनिटजी विषय (भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, प्रबंधन तथा अंग्रेजी) विषयों में कार्यरत सहायक प्रोफेसर एवं एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर लागू होगा।

पढ़ाने के लिए इन शिक्षकों की ड्यूटी राज्य के किसी भी इंजीनियरिंग कालेज में लगाई जा सकेगी। यह वैकल्पिक व्यवस्था होगी, जिसे न तो प्रतिनियुक्ति माना जाएगा न ही तबादला।
नियमों में किया गया प्रविधान

शिक्षक इससे इन्कार भी नहीं कर पाएंगे, क्योंकि अब इसका नियमों में प्रविधान कर दिया गया है। एप्लाइड साइंस व ह्यूमेनिटजी विषय के मौजूदा स्वीकृत पदों को एक साझा शैक्षणिक पूल के रूप में माना जाएगा। कालेजों में कार्यरत सहायक प्रोफेसर के लिए 16 घंटे प्रति सप्ताह और एसोसिएट प्रोफेसर के लिए 14 घंटे प्रति सप्ताह पढ़ाना अनिवार्य होगा। तकनीकी शिक्षा विभाग में गुणात्मक सुधार के मद्देनजर विभाग ने यह निर्णय लिया है।  
कैबिनेट मंजूरी के बाद विभाग ने लागू किया निर्णय

विभाग का दावा है कि संस्थानों में शिक्षकों की कमी को दूर करने व गुणात्मक सुधार की दिशा में यह निर्णय महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। हाल ही में आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा की गई थी। कैबिनेट मंजूरी के बाद विभाग ने इसे लागू कर दिया है।  
यह होगा लाभ

इंजीनियरिंग कालेजों में प्रोफेसर, असिस्टेंट व एसोसिएट प्रोफेसर तीन श्रेणियां है। कुछ कालेजों में तीनों पद भरे हुए हैं, जबकि कुछ में पद रिक्त हैं। एप्लाइड साइंस व ह्यूमेनिटजी विषय इंजीनियरिंग कालेजों में सभी समेस्टर में नहीं पढ़ाए जाते, जिन संस्थानों में ये तीनों पद हैं वहां पर कई बार शिक्षकों के पास पढ़ाने के लिए कक्षाएं ही नहीं होती। विभाग ने निर्णय लिया है कि इसे कार्यभार वितरण और शैक्षणिक युक्तीकरण के लिए कार्यात्मक रूप से परस्पर विनिमेय माना जाएगा। ऐसा होने से शिक्षकों की कैडर संरचना, वेतन, पदक्रम या वरिष्ठता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। अस्थायी शिक्षण कार्यभार का आवंटन छात्र संख्या और संस्थागत आवश्यकता के आधार पर तकनीकी शिक्षा निदेशालय हर साल करेगा ।
ऐसे लागू होगा नियम

नए नियमों के अनुसार निदेशालय एक अकादमिक पूल रजिस्टर बनाया जाएगा, जिसमें भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, प्रबंधन और अंग्रेजी विषयों के सभी सहायक एवं एसोसिएट प्रोफेसरों की योग्यता, विशेषज्ञता, कार्यभार, मूल (पैरेंट) कालेज और उस शैक्षणिक वर्ष की कार्यात्मक तैनाती का पूरा ब्यौरा दर्ज होगा। शिक्षण कार्यभार एआइसीटीई नियमों के अनुसार ही दिया जाएगा।

किसी अन्य कालेज में कार्यात्मक रूप से तैनात किए जाने पर संबंधित शिक्षक को स्थानांतरण या प्रतिनियुक्ति पर नहीं माना जाएगा। वेतन, अवकाश और सेवा संबंधी रिकार्ड मूल संस्थान द्वारा ही संधारित किए जाएंगे। इस प्रकार की अकादमिक तैनाती के लिए किसी प्रकार का टीए, डीए देय नहीं होगा।
पदोन्नति नहीं होगी प्रभावित

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस व्यवस्था से शिक्षक के मूल पद, कैडर, वेतनमान और वरिष्ठता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा तथा होस्ट संस्थान में स्थायी नियुक्ति का कोई अधिकार उत्पन्न नहीं होगा।


तकनीकी शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए ‘फंक्शनल इक्विवेलेंस माडल’ को लागू किया गया है। इससे शिक्षकों की जो कमी होती थी, वह नहीं होगी।
-राजेश धर्माणी, तकनीकी शिक्षा मंत्री।


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