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कुदरत के कहर से कराह उठी देवभूमि, पेयजल योजनाओं को हुआ 1928 करोड़ का नुकसान

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राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में पिछले वर्ष आपदा का कहर पेयजल योजनाओं पर सबसे अधिक टूटा। राज्य में आपदा से विभिन्न योजनाओं को 3792.39 करोड़ की प्रत्यक्ष क्षति हुई, जबकि 312.19 करोड़ रुपये की हानि आंकी गई।

इनमें अकेले पेयजल योजनाओं को 1844.05 करोड़ की प्रत्यक्ष क्षति व 84.17 करोड़ की हानि शामिल है। आपदा से हुए नुकसान के आकलन को तैयार पोस्ट डिजास्टर नीड एसेसमेंट (पीडीएनए) में यह बात सामने आई है।

इसके साथ ही पुनर्वास, पुनर्निर्माण व बेहतर निर्माण के लिए 10,998.95 करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई गई है।

शासन ने इस सिलसिले में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) को रिपोर्ट भेजी है, जिसमें कुल 15,103.52 करोड़ का समग्र आर्थिक प्रभाव दर्शाया गया है। एनडीएमए के विभागाध्यक्ष एवं सदस्य राजेंद्र सिंह ने राज्य की ओर से यह प्रस्ताव मिलने की पुष्टि की और कहा कि इस पर मंथन चल रहा है।

आपदा ने पिछले वर्ष समूचे उत्तराखंड को गहरे जख्म दिए। धराली, थराली, देहरादून समेत राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में जान-माल की बड़े पैमाने पर क्षति हुई। मानसून थमने के बाद राज्य में केंद्रीय टीम ने पीडीएनए किया। उत्तराखंड देश का ऐसा पहला राज्य है, जहां पूरे प्रदेश में पीडीएनए किया गया।

आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार राज्य की भौगोलिक संवेदनशीलता, पर्वतीय परिस्थितियों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए यह रिपेार्ट तैयार की गई, जिसे केंद्र को भेजा गया है।

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट का उद्देश्य केवल क्षति का आकलन ही नहीं, बल्कि भविष्य में अधिक सुद़ृढ, सुरक्षित एवं आपदारोधी उत्तराखंड के निर्माण को योजनाबद्ध पुनर्वास व पुनर्निर्माण का रोडमैप तैयार करना है। रिपोर्ट के आधार पर केंद्र से प्राप्त होने वाले वित्तीय सहयोग से प्रभावित क्षेत्रों में शीघ्र पुनर्बहाली, आजीविका संरक्षण और बुनियादी ढांचे को बिल्ड बैक बैटर के सिद्धांत के अनुरूप सुदृढ़ किया जा सकेगा।
आपदा से हुआ नुकसान (करोड़ रुपये में)

    क्षेत्र प्रत्यक्ष क्षति (₹ लाख में) हानि (₹ लाख में) आर्थिक प्रभाव (₹ लाख में)
   
   
   आवास
   579.18
   28.96
   1397.34
   
   
   शिक्षा
   68.04
   3.40
   310.46
   
   
   स्वास्थ्य
   69.58
   76.54
   2433.35
   
   
   सड़क
   812.59
   00
   1150.7
   
   
   जलापूर्ति
   1844.05
   84.17
   2120.66
   
   
   ऊर्जा
   77.55
   13.54
   122.43
   
   
   कृषि
   3.02
   12.38
   15.40
   
   
   औद्यानिकी
   1.68
   1.83
   3.51
   
   
   पशुपालन
   3.55
   9.81
   13.36
   
   
   मत्स्य
   2.03
   7.26
   9.29
   
   
   पर्यटन
   304.02
   68.45
   372.47
   
   
   वन-पर्यावरण
   27.09
   5.85
   32.94
   


(नोट: आपदा प्रबंधन के संदर्भ में प्रत्यक्ष क्षति और हानि अलग हैं। उदाहरण के लिए बाढ़ से पुल टूटने पर इसे प्रत्यक्ष क्षति कहा जाता है, जबकि पुल टूटने से वाहन न जाने, सामान न बिकने को हानि कहा जाता है)
डीआरआर को मांगे 3017.04 करोड़

उत्तराखंड आपदा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। ऐसे में यहां आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) समय की आवश्यकता है। केंद्र को भेजी गई पीडीएनए रिपोर्ट में इसके लिए राज्य के लिए 3017.04 करोड़ की मांग की गई है।
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