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देवान्शु शेखर मिश्र, रामगढ़। आसन्न नगर निकाय चुनाव को लेकर जिले में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल गया है। कल तक चौक चौराहों पर अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी करने वाले सामान्य,ओबीसी व अनुसूचित जन जाति वर्ग से कई संभावित पुरुष प्रत्याशी की मंशा पर राज्य निर्वाचन आयोग की पहल ने पानी फेर दिया है। चूंकि अध्यक्ष पद अनुसूचित जन जाति वर्ग की महिला उम्मीदवार के लिए आरक्षित किया गया है। इस लिहाज से प्रत्याशी की तलाश अब तेज हो गई है।
माना जा रहा है कि एक पखवारे के अंदर राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। इस लिहाज एसटी महिला उम्मीदवार की खोज भी तेज हो गई है। वैसे इस बार दलीय आधार पर चुनाव नहीं हो रहा है। इसके बावजूद परोक्ष रूप से दलीय आधार पर अध्यक्ष पक्ष के के लिए महिला उम्मीदवार की तलाश तेज हो गई है।
भाजपा, कांग्रेस व झामुमो से भी उम्मीदवार की तलाश तेज है। वर्तमान में कांग्रेस पार्टी से रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र से महिला विधायक के रूप में ममता देवी प्रतिनिधित्व कर रही हैं। ऐसे में अब सशक्त आदिवासी महिला उम्मीदवार की तलाश तेज हो गई है। कल तक अनुसूचित जन जाति वर्ग से उम्मीदवार बनने के सपने देख रहे लोग अब अपनी पत्नी की दावेदारी की तैयारी कर रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश के बाद मन मार कर अब उम्मीद भरी निगाहों से अपनी पत्नी की ओर देख रहे हैं।
बताया जाता है कि पूर्व में प्रतिनिधित्व कर चुके अब अपनी पत्नी को चुनाव लड़वाने की संभावना की तलाश में जुटे हैं। इसके लिए वे लगातार अधिकारियों के संपर्क में जुटे हैं और कोई न कोई जुगत लगाने का प्रयास कर रहे हैं। सबसे बड़ी परेशानी एक के समक्ष यह है कि इनकी पत्नी पारा शिक्षिका के रूप में कार्य कर रही हैं।
इसलिए वे यह जानना चाह रहे हैं कि बगैर इस्तीफा दिए क्या वे अपनी पत्नी को चुनाव लड़वा सकते हैं। हालांकि अधिकारी की ओर से उन्हें स्पष्ट कह दिया गया कि बगैर इस्तीफा स्वीकार कराए चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। अधिकारी की इस बात ने उन्हें दोराहे पर खड़ा कर दिया है। डर इस बात का है कि इस्तीफा दिलवाने के बाद दोबारा नौकरी नहीं मिलेगी और चुनाव जीत गए थे तो ठीक है और हार गए तो कहीं के न रहेंगे।
वर्तमान में मिलने वाली हर महीने हजारों की तनख्वाह से भी हाथ धोना पड़ेगा। यह स्थिति उन्हें अंदर से ही परेशान कर रही है। अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने का अरमान मन में रखने वाले वर्तमान परिस्थिति के लिए राज्य निर्वाचन आयोग तो कभी सरकार को भी कोसने से गुरेज नहीं रहे। पूरे दिन की दिमागी थकान उन्हें शाम होते ही उन्हें रंगीन पानी की घुंट लेने को विवश कर दे रही है। |
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