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देवघर में मकर संक्रांति की धूम, बाबा बैद्यनाथ को एक महीने तक तिल लड्डू और खिचड़ी भोग

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कल मकर संक्रांति पर बाबा बैद्यनाथ को अर्पित होगा तिल का लड्डू



आरसी सिन्हा, देवघर। द्वादश ज्योतिर्लिंग में एक बाबा बैद्यनाथ झारखंड के देवघर में विराजते हैं। त्रेता युग में स्थापित ज्योतिर्लिंग के यहां स्थापित होने से लेकर उनके पूजा पाठ की परंपरा प्राचीन काल से विश्व में चर्चित है। खास अवसरों पर पूजा पाठ की अलग व्यवस्था है। त्यौहार के समय विशेष भाेग और प्रात:कालीन पूजा में विशेष पूजा होती है।

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर बुधवार को प्रात:कालीन पूजा में तिल का बना लड्डू अर्पित होगा। दोपहर के समय श्रीयंत्र मंदिर के निकट खिचड़ी का भोग लगाया जाएगा। यह 14 जनवरी से लेकर माघ मास शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि कुंभ संक्रांति 14 फरवरी तक यानि एक महीना तक सुबह की पूजा में तिल और दोपहर का भोग खिचड़ी होगा।
शिवगंगा में भक्त लगाएंगे डुबकी

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर स्थानीय के साथ साथ तीर्थयात्रियों की अप्रत्याशित भीड़ पूजा अर्चना को लेकर उमड़ जाती है। दान-पुण्य का भी वह दिन खास होता है। पवित्र शिवगंगा तालाब में भक्त डुबकी लगाते हैं और बाबा बैद्यनाथ की पूजा अर्चना करने के बाद दान-पुण्य करते हैं। यहां परंपराओं की अटूट लड़ी है। प्रात:कालीन पूजा, संध्या की आरती।
बाबा बैद्यनाथ को हर दिन लगता भोग

बाबा बैद्यनाथ को हर दिन पूजा के बाद भोग लगता है। ऋतु के हिसाब से भोलेनाथ की पूजा में विशेष होता है। भोग भी विशेष हो जाता है। पावन सावन में शुद्ध घी में तैयार पुरी और बिना नमक का आलू की भुजिया का भाेग अर्पित होता है। भादो, आश्विन और कार्तिक में प्रात:कालीन पूजा के समय लड्डू, पेड़ा और पंचमेवा का भोग लगता है। बहुत ही अलौकिक दरबार है। साल में दो चार ऐसे अवसर आते हैं जब भोलेनाथ को विशेष भोग लगता है। सावन में संक्रांति से संक्रांति तक पुरी भुजिया का विशेष भोग लगता है। यह भोग गर्भगृह में ही लगता है। बाकि के महीनों में अलग अलग भोग बनता है जो श्रीयंत्र मंदिर के अंदर बाबा के नाम पर पुजारी अर्पित कर देते हैं।

यहीं से उनका ध्यान कर उपसर्ग कर दिया जाता है। आपके मन में यह विचार आ रहे होंगे कि हर महीने कैसे भोग बदलता जाता है। आपको बता दें कि सावन, भादो, आश्विन और कार्तिक मास को छोड़ कर शेष माह में श्रीयंत्र मंदिर में बाबा बैद्यनाथ के नाम भोग लगता है। यह मंदिर परिसर में है। यहां दुर्गा पूजा और विशेष अवसर पर हवन होता है। यह बहुत ही पावन स्थल है।

मंदिर की पूजा विधि को जानने वाले परिसर में आने के बाद यहां अवश्य शीश नवाते हैं। इसी हवन कुंड में अगहन माह में दही-चूड़ा। बैशाख में चना-जौ का सत्तू, गुड़ और दही। आषाढ़ में आद्रा नक्षत्र में खीर का भोग लगाया जाता है। माघ महीना में खिचड़ी का भोग मंदिर परिसर स्थित दुर्गा मंडप के समीप तैयार होता है और यहीं से वह भोग बाबा के नाम लगता है। श्रीयंत्र मंदिर में भोग लगाकर श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया जाता है।

इस दौरान बड़ी संख्या में प्रसाद लेने के लिए भक्तों की भीड़ लगी रहती है। बताते हैं कि श्रृंगारी परिवार द्वारा खिचड़ी का भोग तैयार किया जाता है। एक माह तक चढ़ने वाला खिचड़ी का भोग श्रृंगारी परिवार के हाथों चढ़ाया जाता है । यह 14 जनवरी से लेकर माघ मास शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि कुंभ संक्रांति 14 फरवरी पूरे एक माह तक अपनी सुविधानुसार बाबा पर प्रतिदिन बाबा का विशेष भोग खिचड़ी अर्पित किया जाता है । बाबा के निमित्त बाबा मंदिर परिसर स्थित श्रीयंत्र मंदिर में चढ़ाया जाता है।
गंगाजल से बनता विशेष भोग

बाबा पर चढ़ने वाला खिचड़ी विशेष तरह से बनता है । यह उड़द के दाल,अरवा चावल, शुद्ध मसाले के अलावा पानी के जगह पर गंगाजल उपयोग में लाया जाता है। इसके लिए मंदिर इस्टेट की ओर से गंगाजल उपलब्ध करायी जाता है । इसके बाद भक्तों में बंटता है महाप्रसाद। प्रतिदिन पूजा होने के उपरांत खिचड़ी को भक्तों के बीच बांटी जाती है बाबा का खिचड़ी महाप्रसाद लेने के लिए भक्तों में होड़ लग जाती है। इसके लिए भक्त घंटों इंतजार करते हैं।
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