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खेतों में रखवाली करते किसान
केके शर्मा, जागरण, घुंघचाई (पूरनपुर)। हड्डियों में सिहरन पैदा करने वाली सर्दी, चार कदम पर कुछ न नजर आए ऐसा घना कोहरा, गांव की गलियों में रात गहराते पसरा हुआ सन्नाटा भी निराश्रित गोवंशीय पशुओं के फसलों के चर जाने के डर सामने बौना है। बंद कमरों में जहां लोग सर्दी में ठिठुर रहे हों, लेकिन खेतों की मेड़ों पर खुले में किसान बैठकर फसलों की रखवाली करने को मजबूर हैं।
किसान की आंखों में नींद नहीं आती। दिन भर अन्य कार्यों में व्यस्त होकर परेशान किसान रात होते ही फसल की रखवाली में जुट जाते हैं। कड़ाके की ठंड और सर्द हवाओं में खुले आसमान तले रात बिताने को मजबूर हैं। खेतों पर जलती आग की लपटें न सिर्फ सर्दी भगाने का जरिया हैं। बल्कि किसान के भीतर जल रही चिंता और बेबसी की भी तस्वीर पेश करती हैं।
खुले आसमान के नीचे फटे कंबलों और पुराने कपड़ों में लिपटे किसान अलाव के पास बैठे रहते हैं। हर आहट पर चौकन्ना होना, हर रात डर के साये में काटना अब किसान की दिनचर्या बन चुकी है। रविवार की रात दैनिक जागरण की टीम ने पड़ताल की। किसानों की बेबसी देखने को मिली। घने कोहरे और किसान तरह खेत पर रात बिता कर फसल की रखवाली करते हैं।
दिलावरपुर में पेड़ के नीचे रात काट रहे विकास
टीम को दियोरिया सड़क से निकली तो सड़क किनारे एक पेड़ के नीचे कुछ आवाजें सुनाई दी। रात में समय 9:35 बजे रहे थे। चहुंओर अंधेरा था। घना कोहरा और शीतलहर से कंपकंपी छूट रही थी। सड़क के किनारे पड़ी पराली में गांव दिलावरपुर निवासी विकास कंबल ओढ़े बैठा था।
एक हाथ में टार्च थी। रविंद्र और विकास फोन देख कर समय काट रहे थे। सर्द रात मे राजीव की आंख लग गई थी। पूछने पर बताया कि बेसहारा पशुओं का झुंड कब खेतों में घुस उनकी माह की मेहनत को बर्बाद कर दे कोई पता नहीं है। रात में बारी-बारी से जागकर फसल की रखवाली करनी पड़ रही है।
जनकापुर में मचान से खेतों पर टकटकी लगाए मिले हीरा लाल
इसके बाद रात 9:40 बजे टीम गांव जनकापुर पहुंची। किसान हीरा लाल और सोमपाल खेत में बने मचान पर रजाई की ओट लिए खेतों की ओर टकटकी लगाए बैठे थे। पूछने पर हीरालाल ने बताया कि चार बीघा गेहूं की फसल लगा रखी है। तारबंदी करने में तीन हजार रुपये खर्च हो गए। इसके बाद भी फसल सुरक्षित नहीं है। दोनों लोग रात के अंधेरे में मचान पर बैठकर बारी से हांका लगाकर खेत की रखवाली करते हैं। सुबह मजदूरी करने जाना होता है।
सिमरिया में पराली जलाकर खेत की रखवाली करते मिले पुत्तूलाल
रात 10:10 बजे रहे थे। जागरण की टीम गांव सिमरिया ताल्लुके अजीतपुर के खेतों में पहुंची। खेतों की तरफ आग जलने की कुछ रोशनी दिखाई दी। पास में पहुंचने पर आग के पास बैठे 60 वर्षीय पुत्तूलाल अपने साथी बालकराम के साथ सर्द रात को चुनौती देकर कच्चे रास्ते पर पराली जलाए बैठे थे।
लक्ष्मण खेतों में हांका लगा रहे थे। टीम के पंहुचते ही तीनों किसान आग का सहारा लेकर बैठ गए। बोले, बच्चे हरियाणा मजदूरी करने गए हैं। बेसहारा पशु ताराबंदी के बाद भी खेतों में घुस जाते हैं। परेशान हैं।
लुकहिटाई में टार्च की रोशनी से भगवानदास कर रहे फसल की रखवाली
रात 10:25 बजे गांव लुकटिहाई में खेतों में टार्च की रोशनी दिखी। पास पहुंचने पर गांव के किसान अमित और भगवानदास गेहूं के खेत में खड़े होकर चारों ओर टार्च लगाकर पशुओं को खेत से बाहर भगा रहे थे।
किसानों का कहना है कि घर में बच्चे सो जाते हैं। लेकिन पिता की आंखों में नींद नहीं आती। सुबह फिर मजदूरी पर निकलना है। फिर भी रात खेत में काटनी पड़ती है। किसानों ने बताया कि अगर एक रात भी चूक गए तो माह की मेहनत खत्म हो सकती है।
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