डायल 112 वाहन को धक्का लगाते लोग।
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। स्वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्या पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जिस डायल 112 आपातकालीन पुलिस सेवा को ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए शुरू किया था, वह सेवा महज पांच माह में ही सवालों के घेरे में आ गई है। सतना जिले से सामने आए एक घटनाक्रम ने इस अत्याधुनिक सेवा की तकनीकी तैयारी और रखरखाव पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
सोमवार को सतना जिले के नागौद थाना क्षेत्र में डायल 112 की एक फर्स्ट रिस्पॉन्स व्हीकल (FRV) बीच रास्ते बंद हो गई। स्थिति यह बनी कि पुलिसकर्मियों को स्थानीय लोगों की मदद से वाहन को धक्का देकर स्टार्ट कराना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया और आमजन के बीच आपातकालीन सेवा की विश्वसनीयता पर चर्चा तेज हो गई है।
सड़क पर बंद हुई एफआरवी
घटना सोमवार दोपहर करीब तीन बजे नागौद–उचेहरा मुख्य मार्ग पर पोड़ी चौकी के पास की है। आपातकालीन सेवा में तैनात डायल 112 वाहन (क्रमांक MP 04 T 03128) अचानक स्टार्ट होना बंद हो गया। वाहन चालक ने काफी देर तक उसे चालू करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
आखिरकार पुलिसकर्मियों को आसपास मौजूद नागरिकों की मदद लेनी पड़ी। कई लोगों ने मिलकर चमचमाती डायल 112 को धक्का लगाया, तब जाकर वाहन स्टार्ट हो सका। इसके बाद एफआरवी को सीधे सर्विस सेंटर ले जाया गया।
यह भी पढ़ें- शहडोल के शासकीय स्कूल में \“पतली कमरिया\“ की धुन पर छात्राओं संग शिक्षिका ने लगाए ठुमके, बनाई रील, Video वायरल
बैटरी खराबी की चर्चा
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी रही कि संबंधित एफआरवी लंबे समय से बैटरी संबंधी समस्या से जूझ रही थी। इसके बावजूद वाहन को आपातकालीन ड्यूटी में लगाया गया, जो किसी भी आपात स्थिति में गंभीर खतरा पैदा कर सकता था।
25 एफआरवी मिली थीं सतना को
डायल 100 के स्थान पर शुरू की गई डायल 112 सेवा के तहत सतना जिले को 25 FRV उपलब्ध कराई गई थीं। उद्देश्य था कि किसी भी आपात स्थिति में पुलिस तेजी से मौके पर पहुंचे। लेकिन इस घटना ने वाहनों के मेंटेनेंस और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वाहन के सेल्फ में किसी प्रकार की तकनीकी खामी आ गई थी।
- आशोक पाण्डेय, थाना प्रभारी नागौद |