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भारत पर डायबिटीज का भारी आर्थिक बोझ, अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा खर्च

Chikheang Yesterday 20:57 views 369
  

डायबिटीज का आर्थिक नुकसान।  



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। डायबिटीज के कारण पड़ने वाले आर्थिक बोझ के मामले में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है। इसके इलाज में देश को हर वर्ष करीब 11.4 लाख करोड़ डॉलर की चपत लगती है। इस मामले में अमेरिका पहले स्थान पर है, जिसे 16.5 लाख करोड़ डॉलर का नुकसान उठाना पड़ता है। तीसरे नंबर पर आने वाले चीन का खर्च 11 लाख करोड़ डॉलर है।

नवंबर 2024 में लैंसेट पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया था कि विश्व के एक चौथाई से अधिक डायबिटीज रोगियों के भारत में रहने का अनुमान है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एप्लाइड सिस्टम्स एनालिसिस और आस्ट्रिया की वियना यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनोमिक्स एंड बिजनेस के शोधकर्ताओं ने 204 देशों में मधुमेह के आर्थिक प्रभाव का आकलन किया।

नेचर मेडिसिन पत्रिका में प्रकाशित शोध में कहा गया है कि परिवार के सदस्यों द्वारा प्रदान की जाने वाली अनौपचारिक देखभाल को छोड़कर डायबिटीज के इलाज में वैश्विक लागत लगभग 10 लाख करोड़ डॉलर है। यह विश्व के वार्षिक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 0.2 प्रतिशत है। अनौपचारिक देखभाल को शामिल करने पर यह आंकड़ा 152 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाता है। यह दुनिया के वार्षिक जीडीपी का 1.7 प्रतिशत है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि अल्जाइमर या कैंसर की तुलना में डायबिटीज का आर्थिक प्रभाव बहुत अधिक है। वियना यूनिवर्सिटी में मैक्रोइकोनमिक्स के प्रोफेसर और इस शोध के लेखक क्लाउस प्रेटनर ने कहा कि मरीजों की देखभाल करने वाले अक्सर श्रम बाजार से बाहर हो जाते हैं। इससे अतिरिक्त आर्थिक लागत उत्पन्न होती है। अनौपचारिक देखभाल की हिस्सेदारी कुल आर्थिक बोझ का लगभग 90 प्रतिशत है।

शोधकर्ताओं ने बताया कि भारत और चीन में डायबिटीज की उच्च आर्थिक लागत का मुख्य कारण बड़े पैमाने पर आबादी का इससे प्रभावित होना है, जबकि अमेरिका में यह मुख्य रूप से उपचार की उच्च लागत और पूंजी के विस्थापन के कारण है।

उच्च और निम्न आय वाले देशों के बीच एक प्रमुख अंतर उपचार लागत और श्रम का नुकसान है। उच्च आय वाले देशों के लिए उपचार लागत आर्थिक बोझ का 41 प्रतिशत है, जबकि निम्न आय वाले देशों के लिए यह 14 प्रतिशत है।

शोध पत्र के सह-लेखक माइकल कुहन ने कहा कि यह इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि डायबिटीज जैसी दीर्घकालिक बीमारियों के लिए चिकित्सा उपचार केवल उच्च आय वाले देशों के लिए सीमित है। स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना, नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित आहार डायबिटीज को रोकने और इसके आर्थिक प्रभाव को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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