प्रतीकात्मक चित्र
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। जिला अस्पताल की इमरजेंसी के सामने सोमवार दोपहर मानवता को शर्मसार करने वाला घटनाक्रम सामने आया। एक महिला को मानसिक रोगी बताकर उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। महिला को अर्धनग्न अवस्था में जानवरों की तरह ई-रिक्शा में पैर रखने वाली जगह जबरन लिटाया गया। हैरानी की बात यह है कि इतने लोग होने के बाद भी सब तमाशबीन बने रहे।
हर कोई यह सोचकर आगे बढ़ता रहा कि मुझसे क्या मतलब है। यह पूरी घटना करीब 2:30 बजे से 2:55 बजे के बीच की बताई जा रही है, जिसका वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। वीडियो में लोग वहां इस पूरे घटनाक्रम को तमाशबीन की तरह देखते रहे। महिला के साथ दुर्व्यवहार की बात सामने आते ही अस्पताल एसआइसी स्टाफ के साथ दौड़ पड़ीं।
बेडशीट डालकर महिला को बमुश्किल कपड़े पहनवाकर वहां से रवाना किया गया। प्रसारित वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि एक युवक महिला के बाल पकड़कर उसे खड़ा किए हुए है। महिला बार-बार खुद को पूरी तरह ठीक बताते हुए कह रही है कि उसका फर्जी मानसिक रोग का सर्टिफिकेट बनवाया गया है और उसके साथ मारपीट की जाती है।
महिला मदद की गुहार लगाती रही, लेकिन वहां मौजूद लोग तमाशबीन बने रहे। किसी ने भी आगे बढ़कर महिला को बचाने या उसे ढकने तक का प्रयास नहीं किया। घटना जिला अस्पताल जैसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले स्थान पर हुई, जहां हर समय डाक्टर, नर्सिंग स्टाफ, सुरक्षाकर्मी और मरीजों के तीमारदार मौजूद रहते हैं।
इसके बावजूद महिला को इस हालत में करीब 25 मिनट तक खड़ा रखा गया, जो अस्पताल की व्यवस्था और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। घटनाक्रम की जानकारी मिलने पर अपर निदेशक एवं प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. संगीता गुप्ता स्टाफ नर्स के साथ मौके पर पहुंचीं। उन्होंने तत्काल महिला को चादरें डलवाकर ढका और कपड़े पहनवाए। इसके बाद महिला को वहां से भिजवाया गया।
इसके बाद उन्होंने मौके पर मौजूद कर्मचारियों को फटकार लगाई और भविष्य में इस तरह की लापरवाही न होने के निर्देश दिए। घटना के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। मानसिक रोगी होने का दावा कर किसी महिला के साथ इस तरह का व्यवहार न सिर्फ कानूनन अपराध है, बल्कि सामाजिक और नैतिक दृष्टि से भी निंदनीय है।
इमरजेंसी के सामने महिला के अर्धनग्न होने की जानकारी मिलने पर महिला स्टाफ नर्स के साथ मैं स्वयं पहुंची थी। महिला को कपड़े पहनवाए थे। इसके बाद उन्हें वहां से रवाना किया गया।
- डा. संगीता गुप्ता, अपर निदेशक एवं प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक
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