LHC0088 • 1 hour(s) ago • views 707
ईरान में सामान्य होते नहीं दिख रहे हालात। (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान में दो हफ्ते से जारी महंगाई के विरोध वाले आंदोलन में हालात बेकाबू हो गए हैं। सरकार की कड़ी चेतावनी के बावजूद शनिवार-रविवार को बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे लोगों ने जता दिया कि वे पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं।
राजधानी तेहरान सहित 100 से ज्यादा शहरों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों, फायरिंग, तोड़फोड़ और आगजनी में सैकड़ों लोग मारे गए हैं। अमेरिकी संस्था ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के टकराव में अभी तक 538 लोग मारे गए हैं जिनमें 48 सुरक्षाकर्मी हैं। लेकिन ईरान की अर्ध सरकारी न्यूज एजेंसी तस्नीम ने 109 सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने की पुष्टि की है। केवल इस्फहान क्षेत्र में 30 सुरक्षाकर्मी मारे जाने की सूचना है। तस्नीम ने मारे गए प्रदर्शनकारियों की संख्या नहीं बताई है। देश में 10,670 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
ईरान के हालात पर अमेरिका की नजर
ईरान के तेजी से बिगड़ते हालात पर अमेरिका नजर रखे हुए है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे ईरानी लोगों की मदद के लिए तैयार हैं। जबकि ईरान सरकार ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी हमले की स्थिति में वह नजदीक के अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल पर जवाबी कार्रवाई करेगी। ईरान सरकार के इस बयान के बाद इजरायल में सेना हाई अलर्ट पर आ गई है। यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सला वान डेर लिएन ने प्रदर्शनकारी ईरानी लोगों का समर्थन किया है।
ईरान सरकार का क्या है रुख?
इस बीच अमेरिका, जर्मनी और स्पेन में ईरान की इस्लामिक सत्ता के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं। स्थितियों से निपटने के लिए ईरान सरकार आंदोलनकारियों को मिले-जुले संकेत दे रही है। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि सरकार प्रदर्शनकारियों से बात करने के लिए तैयार है लेकिन दंगाइयों से कोई बात नहीं होगी। उन्होंने देश के सामाजिक एकता को तोड़ने की कोशिश की है, उन पर कड़ी कार्रवाई होगी। पेजेश्कियान ने देश में अशांति के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है।
प्रोसीक्यूटर जनरल मुहम्मद मुवाहेदी आजाद ने न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे तोड़फोड़ और आगजनी के मामलों में गिरफ्तार लोगों के मामलों की न्यायालयों में सुनवाई की प्रक्रिया को तेज करें जिससे आरोपितों को जल्द दंडित किया जा सके।
उन्होंने कहा, तोड़फोड़ और आगजनी करने वाले अल्लाह के दुश्मन हैं और ऐसे लोगों के लिए देश के संविधान में मौत की सजा है। देश की इलीट फोर्स रिवोल्यूशनरी गार्ड ने प्रदर्शनकारियों को चेताया है कि वे हिंसा और अराजक स्थितियों से दूर रहें। जबकि सेना ने कहा है कि आंदोलन बढ़ने पर वह राष्ट्रीय हित के अनुरूप कार्य करेगी।
ईरान लौटने की तैयारी में रजा पहलवी
ईरान के अपदस्थ शाह के पुत्र व पूर्व क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने कहा है कि कट्टरपंथी इस्लामिक सत्ता अंतिम सांसें ले रही है। बीते 46 वर्षों से लोग इस शासन को झेल रहे हैं और अब वे बदलाव चाहते हैं। वे देश में पंथ निरपेक्ष लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था चाहते हैं।
अमेरिका में मौजूद पहलवी ने कहा है कि वह ईरान वापसी की तैयारी कर रहे हैं। पहलवी के इस बयान की पुष्टि कई स्थानों पर प्रदर्शनों के दौरान शाह की वापसी की मांग वाले पोस्टर कर रहे हैं। जबकि देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ राजधानी तेहरान सहित सभी शहरों में नारे गूंज रहे हैं।
विदित हो कि 1979 में इस्लामिक क्रांति के जरिये शाह रजा पहलवी को हटाकर अयातुल्ला खोमेनी ईरान की सत्ता पर काबिज हुए थे। खोमेनी के निधन के बाद से खामेनेई सर्वोच्च नेता पद पर काबिज हैं।
यह भी पढ़ें: ईरान में क्यों हो रहा विरोध प्रदर्शन? पढ़िए 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से अब तक क्या-क्या हुआ |
|