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सामान्य दर्शनार्थियों को भी शीघ्र सुलभ होगा ‘राम परिवार’ का दर्शन।
लवलेश कुमार मिश्र, अयोध्या। रामलला के सामान्य दर्शनार्थियों को भी ‘राम परिवार’ का दर्शन सुलभ हो सकेगा। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से शीघ्र ही इसकी अनुमति प्रदान की जा सकती है। पूरक मंदिरों में दर्शन शुरू करने के साथ सीमित संख्या में सामान्य दर्शनार्थियों को भी प्रवेश दिया जाने लगेगा।
अभी राम परिवार का दर्शन ऐसे श्रद्धालु ही कर पा रहे हैं, जिनके सुगम, नित्य या विशिष्ट दर्शन पास बने होते हैं। सामान्य दर्शनार्थियों को केवल रामलला का दर्शन करा कर वापस कर दिया जाता है।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के प्रथम तल पर गत वर्ष पांच जून को एक राजा के रूप में भगवान श्रीराम को प्रतिष्ठित कराया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामजन्मभूमि परिसर के सात पूरक मंदिरों में स्थापित प्रतिमाओं के साथ ही इसकी भी प्राण प्रतिष्ठा की थी।
पूरक मंदिरों में नहीं है दर्शन करने की अनुमति
इसके उपरांत 13 जून से ही ट्रस्ट ने राम परिवार का दर्शन आरंभ करा दिया था, परंतु पूरक मंदिरों में अभी तक दर्शन की अनुमति नहीं दी गई है। केवल अतिविशिष्टजन ही पूरक मंदिरों में दर्शन कर पाते हैं।
हालांकि प्राण प्रतिष्ठा के उपरांत से ही ट्रस्ट ने सभी पूरक मंदिरों में विधिवत पूजन-अर्चन आरंभ करा दिया था। राम परिवार में दर्शन शुरू करने के समय से ही ट्रस्ट ने केवल उन्हीं श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति प्रदान की थी, जिनके सुगम, विशिष्ट या नित्य दर्शन पास बने होते हैं।
तत्समय इसका कारण प्रथम तल पर निर्माण जारी रहने और गर्भगृह के सम्मुख कम स्थान उपलब्ध होना बताया गया था। अब जबकि प्रथम तल पर चल रहे निर्माण पूर्ण हो चुके हैं और ट्रस्ट पूरक मंदिरों में भी दर्शन आरंभ करने की योजना पर विमर्श कर रहा है तो राम परिवार में भी दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ाने की योजना बनी है।
सूत्रों का कहना है कि सुगम व विशिष्ट पासधारकों के साथ ही प्रत्येक घंटे सीमित संख्या में सामान्य दर्शनार्थियों को भी दर्शन के लिए भेजा जाएगा। यद्यपि अभी संख्या का निर्धारण नहीं किया गया है। इसका आकलन किया जा रहा है।
‘राम परिवार’ में स्थापित हैं छह प्रतिमाएं
राम मंदिर के प्रथम तल पर प्रतिष्ठित राम परिवार में छह प्रतिमाएं स्थापित हैं। इसमें भगवान श्रीराम के साथ माता जानकी सिंहासन पर विराजित हैं तो बाएं-दाएं शत्रुघ्न व लक्ष्मण खड़े हैं, जबकि अनुज भ्राता भरत व अनन्य भक्त हनुमानजी चरणों में बैठे हैं। सामूहिक रूप से इन्हें राम परिवार कहा जाता है। |
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