मकर संक्रांति 2026। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, सिवान। सनातन धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, तब यह पर्व मनाया जाता है। इस साल मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी यानी गुरूवार को मनाया जाएगा। ज्योतिष गणना के अनुसार 14 जनवरी यानी बुधवार की रात 9 बजकर 41 मिनट पर भगवान सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
इसी के साथ भगवान सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे। आंदर के पड़ेजी निवासी आचार्य पंडित उमाशंकर पांडेय ने बताया कि धर्मशास्त्रों में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि संक्रांति प्रदोष काल के बाद रात में हो तो, उसका पुण्य काल अगले दिन माना जाता है। ऐसे में इस बार मकर संक्रांति का स्नान दान और धार्मिक पुण्य कर्म 15 जनवरी को करना शास्त्र सम्मत होगा।
एक फरवरी से शुरू होंगे वैवाहिक सहित समस्त मांगलिक कार्य
आचार्य ने बताया कि 15 जनवरी को भगवान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ खरमास समाप्त होगा, लेकिन 31 जनवरी तक शुक्र के अस्त होने की वजह से विवाह का शुभ समय एक फरवरी से शुरू होगा। शुक्र पश्चिम दिशा में उदय होंगे और फरवरी से मांगलिक कार्य पुन: सुचारू हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति का पर्व अत्यधिक खास पर्व है। इस दिन विशेषकर दान पुण्य और नदी में स्नान करने का अधिक महत्व माना जाता है। पवित्र नदी में स्नान के बाद भगवान भास्कर को जल में लाल चंदन, लाल फूल, अक्षत मिलाकर अर्घ्य देने से आरोग्य, धन, सुख-समृद्धि और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
वहीं मकर संक्रांति को लेकर लोग तैयारी में जुट गए हैं। इस दाैरान कई जगहों पर दही-चिउरा भोज व पतंग उत्सव का भी आयोजन किया जाएगा।
शहर से लेकर गांव तक सजी हैं तिलकुट की दुकानें
मकर संक्रांति के त्योहार में अब महज तीन दिन ही शेष रह गया है। ऐसे में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के बाजार में तिलकुट की दुकानें सज गई हैं। बाजार में पर्व को लेकर चारो तरफ रौनक दिखाई दे रही है। लाेग तिल, चिउरा, मक्का, मूंगफली, लाई आदि की खरीदारी कर रहे हैं।
वहीं, तिलकुट की सोंधी खुशबू से पूरा बाजार महक उठा है। गांव की महिलाएं जहां ढ़ूढ़ा लाई और तिलवा तैयार कर रही हैं। वहीं चूड़ा की मिलें भी देर रात तक चल रही है। बाजार में सुबह से ही देर रात तक तिलकुट की खरीदारी को भीड़ लग रही है।
वहीं, लट्ठा, चाकलेट, मारवाड़ी, इलायची व खस्ता पट्टी सहित विभिन्न तरह के गजक भी उपलब्ध हैं। काला व सफेद तिल के लड्डु भी बिक रहे हैं। लोग खुद के लिए तिलकुट की खरीदारी कर रहे हैं। साथ ही अपने सगे-संबंधियों के यहां उपहार के लिए भी जमकर खरीदारी कर रहे हैं।
दुकानदारों की मानें तो मकर संक्रांति में अब तीन दिन ही शेष बचे हुए हैं। ऐसे में ग्राहकों के द्वारा दूध व दही की डिमांड आनी शुरू हो गई है। जानकारों की मानें तो आम दिनों की तुलना में करीब चार से पांच गुणा दूध की खपत का अनुमान है। वहीं तिलकुट की डिमांड भी बढ़ गई है। |