मेरठ से दिल्ली तक बेहतर कनेक्टिविटी के बाद अब चौराहों के संवरने की बारी।
जागरण संवाददाता, मेरठ। नमो भारत और मेरठ मेट्रो के संचालन से दिल्ली तक बेहतर कनेक्टिविटी के साथ बेहद सुगम हो गई हैं, लेकिन शहर के अंदर की ट्रैफिक व्यवस्था अभी भी जामयुक्त और असुरक्षित है।
तेज रफ्तार का सुहाना सफर करके आने वाले लोग चौराहों पर जाम में फंस रहे हैं। यह समस्या तब और भी बढ़ सकती है, जब दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम सहित बाहरी जनपदों से लोग मेरठ आएंगे।
फीडर सेवाओं में वृद्धि के साथ यह समस्या विकराल रूप ले सकती है। इसे देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने यातायात नियंत्रण और जाम मुक्त व्यवस्था बनाने के लिए मंथन शुरू कर दिया है। इस कड़ी में सिग्नल प्रणाली से छूटे सभी चौराहों को आइटीएमएस (इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) के कंट्रोल रूप से जोड़ने की तैयारी है।
कमिश्नर भानू चंद्र गोस्वामी ने मेडा, नगर निगम और ट्रैफिक विभाग को सभी चौराहों को आइटीएमएस योजना में कवर करने का एक समग्र प्रस्ताव बनाकर जल्द प्रस्तुत करने के लिए कहा है। योजना के तहत सभी चौराहों को 360 डिग्री पर घूमने वाले हाइटेक वायरलेस कैमरों से लैस किया जाएगा।
प्रत्येक चौराहे पर 10 से 15 कैमरे लगाए जा सकते हैं। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कैमरे केवल चौराहे तक सीमित न रहें, बल्कि इससे जुड़े सभी मार्गों पर भी इनकी नजर रहे।
कैमरे की मदद से कंट्रोल रूम में बैठकर ट्रैफिक पुलिस न केवल रीयल टाइम में यातायात की स्थिति देखकर उसे नियंत्रित कर सकेगी, बल्कि ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों को ई-चालान भी जारी कर सकेगी। इसके अलावा अपराधिक घटनाओं पर भी लगाम लगाई जा सकेगी।
मेडा ने 75 चौराहों की सूची तैयार की है। वायरलेस तकनीक के कैमरे उन स्थानों पर भी लगाए जा सकेंगे जहां केबल बिछाना मुश्किल है। इससे वायरिंग फाल्ट की समस्या से भी छुटकारा मिलेगा।
इनमें से कुछ कैमरे फेस डिटेक्शन तकनीक के होंगे, जो भीड़ में भी वांछित अपराधियों की पहचान करने में सक्षम होंगे। नाइट विजन क्षमता के कारण ये कैमरे रात के अंधेरे में भी स्पष्ट तस्वीरें रिकार्ड कर सकेंगे।
पावर कट होने पर इनमें बैकअप की सुविधा भी होगी। संदिग्ध गतिविधियों और अपराधियों की मूवमेंट को ट्रैक करने के लिए इन कैमरों का डेटा सीधे पुलिस के डेटाबेस से लिंक रहेगा।
शहर का 60 प्रतिशत हिस्सा आइटीएमएस से छूटा
अभी तक सिग्नल प्रणाली के तहत शहर के चौराहों पर यातायात संचालन तेजगढ़ी चौराहा, डिग्गी तिराहा, एल ब्लाक तिराहा, बच्चा पार्क चौराहा, गांधीबाग चौराहा, हापुड़ अड्डा, जेलचुंगी और कमिश्नर आवास चौराहा पर ही हो रहा है।
शहर का करीब 60 प्रतिशत क्षेत्र इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से छूटा हुआ है, जिसमें माधव चौक, बेगमपुल, रेलवे रोड चौराहा, फुटबाल चौराहा, शापरिक्स माल चौराहा, बिजली बंबा बाइपास चौराहा, साकेत इमली चौराहा, सर्किट हाउस चौराहा, मवाना रोड चौराहा, गंगानगर तिराहा, कसेरूबक्सर चौराहा, कंकरखेड़ा शिवचौक चौराहा, टीपीनगर तिराहा सहित कई प्रमुख चौराहे शामिल हैं। इन चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस के सिपाही पुराने ढर्रे से यातायात संचालित कर रहे हैं।
48 करोड़ मिले हैं, जरूरत 100 करोड़ से अधिक की
नगर निगम को आइटीएमएस योजना के विस्तार के लिए शासन से 48 करोड़ रुपये मिले हैं, लेकिन अधिकारियों की दुविधा यह है कि शहर के सभी चौराहों को इंटीग्रेट करने पर करीब 100 करोड़ से ज्यादा खर्च का अनुमान है। ऐसे में दो विकल्पों पर मंथन चल रहा है।
एक तो जो धनराशि मिली है, उससे कुछ चौराहे कवर कर लिए जाएं। बचे हुए चौराहों के लिए शासन से धनराशि मांग ली जाए। दूसरा विकल्प यह है कि सभी चौराहों के लिए एकमुश्त धनराशि मांग कर एक साथ काम किया जाए। दोनों ही तरह के प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजे जाएंगे।
नमो भारत-मेट्रो के संचालन से शहर का आवागमन तीव्र होगा। ऐसे में सुगम और सुरक्षित यातायात मुहैया कराने के लिए आइटीएमएस का विस्तार करने की योजना है।
शहर के प्रत्येक चौराहे को सिग्नल प्रणाली, वायरलैस कैमरे से युक्त करने की योजना पर काम चल रहा है। मेडा, ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम तीनों मिलकर काम कर रहे हैं।
-प्रमोद कुमार सिंह, मुख्य अभियंता नगर निगम।  |