ठंड में दिनरात चल रहे चाक, फैक्ट्रियों में बना दीपावली जैसा माहौल। जागरण
संवाद सूत्र, भटहट। परदेस से आने वाली कलाकृतियों की मांग ने टेराकोटा शिल्पकारों की व्यस्तता बढ़ा दी है। ठंड में टेराकोटा शिल्पकारों की फैक्ट्रियों में दीपावली जैसा माहौल बन गया है।
अग्रिम आर्डर को पूरा करने के लिए दिनरात काम चल रहा है। शिल्पकारों का कहना है कि परदेस से बढ़ी संख्या में आर्डर मिले हैं, जिनकाे मार्च तक हर हाल में पूरा करना है। हालांकि कोहरे की वजह से कलाकृतियों के सूखने में काफी समय लग रहा है। लेकिन कड़ाके की ठंड में दिनरात चाक चल रहे हैं।
एक जिला एक उत्पाद में शामिल होने के बाद टेराकोटा को पर्याप्त बाजार मिलने लगा है। भटहट ब्लाक क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांवों में टेराकोटा की मूर्तियां और अन्य कलाकृतियां बनाने वाले शिल्पकारों की व्यस्तता बढ़ती जा रही है।
लगड़ी गुलरिहा के शिल्पकार रविंद्र प्रजापति ने बताया कि मैसूर से बड़े आकार वाले तीन गाड़ी से अधिक हाथी और घोड़े के निर्माण का आर्डर मिला है, जिसे समय पर पूरा करने के लिए पूरी टीम लगी हुई है। एक हाथी और घोड़े की कीमत 4500 से पांच हजार तक निर्धारित की गई है। इसे मार्च तक पहुंचा देना है। पहले जनवरी से लेकर मार्च तक काम बेहद ही कम रहता था।
हाफिजनगर के सूरज कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से टेराकोटा शिल्प को लगातार प्रोत्साहन दिए जाने से इसकी मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। लोग घरों की सजावट, पर्व-त्योहारों और उपहार देने के लिए टेराकोटा की कलाकृतियों को प्राथमिकता दे रहे हैंं। माघ मेला से लेकर गोरखनाथ के खिचड़ी मेला और महोत्सव में भी दुकानें सजती हैं। इसलिए समय से काम पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।
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शिल्पकार राजन प्रजापति ने बताया कि जीतेंद्र निषाद, राजकुमार निषाद, करन निषाद और गुरुदेव निषाद सहित अन्य कारीगर लगातार कार्य में जुटे हैं। वर्तमान समय में अग्रिम आर्डर का दबाव काफी अधिक है। कड़ाके की ठंड के बावजूद इन दिनों कार्यशाला में दिनरात काम चल रहा है।
मैसूर के अलावा कलाकृतियों को हैदराबाद के चित्तूर, तेलंगाना, राजस्थान के पोखरण, बेंगलुरु सहित कई शहरों में भेजा रहा है। शिल्पकार पन्नेलाल प्रजापति ने बताया कि इस बार दीपावली का इंतजार नहीं करना पड़ा है। नए वर्ष के पहले माह में इतना आर्डर मिल चुका है कि समय पर आपूर्ति के लिए कारीगरों को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है। यदि ऐसी ही स्थिति बनी रही तो आगे चलकर बड़े पैमाने पर मिट्टी का इंतजाम करना पड़ेगा। |