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दुष्कर्मी से शादी, फिर दहेज प्रताड़ना व तीन तलाक... 23 साल पुराने केस में अब आया फैसला

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जागरण संवाददाता, भागलपुर। 23 साल पहले दुष्कर्म के आरोपित से ही पंचायत में पीड़िता की शादी, महज कुछ दिनों के बाद में उसी रिश्ते में दहेज प्रताड़ना एवं तीन तलाक का विवाद और अब अदालत से सजा। अपराध, सामाजिक समझौते और लंबी न्यायिक प्रक्रिया की उलझी परतों वाले इस असामान्य केस में बुधवार को प्रथम जिला सत्र न्यायाधीश मिलन कुमार की अदालत में निर्णायक सुनवाई हुई।

जगदीशपुर के इस मामले में अदालत ने दुष्कर्म और दहेज प्रताड़ना दोनों मामलों में दोषी पाए गए मुहम्मद वसीम उर्फ गुड्डू को दुष्कर्म के लिए सात वर्ष की कठोर कैद की सजा सुनाई। अदालत ने पांच हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया, जिसकी अदायगी नहीं करने पर तीन माह की अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतनी होगी।

अदालत ने दहेज प्रताड़ना में भी उसे तीन वर्ष की कठोर कैद और दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक श्रीकिशोर यादव ने बहस की।
क्या है मामला

27 नवंबर 2003 की शाम करीब साढ़े सात बजे की घटना है। जगदीशपुर थानाक्षेत्र की युवती रोज की तरह खेत में शौच के लिए गई थी। उसी वक्त पहले से घात लगाए मुहम्मद वसीम उर्फ गुड्डू ने छुरे का भय दिखाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। विरोध करने और शोर मचाने की कोशिश पर वसीम ने लड़की के गले पर छूरा सटाकर काट देने व गोली मारने की धमकी दी। लड़की तब जान बचाने की गरज से शांत रही।

वहां से घर आई तो अपने मम्मी-पापा को घटना की जानकारी दी थी। लड़की के स्वजन शिकायत लेकर वसीम के घर पहुंचे तो वहां से कानूनी कार्रवाई से बचने की कोशिश शुरू हुई। वसीम के पिता ने एक सप्ताह के भीतर शादी कराने का भरोसा देकर मामला दबाने का प्रयास किया। बाद में टालमटोल किया जाने लगा तो गांव में पंचायत बैठी और सामाजिक दबाव में दुष्कर्म के आरोपित वसीम व पीड़िता का विवाह करा दिया गया।

यह निर्णय उस समय विवाद थामने का उपाय माना गया, लेकिन आगे चलकर यही संबंध नए विवाद की वजह बना। विवाह के महज एक सप्ताह बाद युवती को यह कहकर मायके भेज दिया गया कि बाद में विदा कर लिया जाएगा, किंतु ससुराल पक्ष ने उसे वापस नहीं बुलाया। आरोप है कि इसके बाद 20 हजार रुपये नकद समेत अन्य सामान दहेज के रूप में मांगे गए।

मांग पूरी नहीं होने पर रिश्ते में दरार बढ़ती गई और अंततः मोबाइल फोन पर तीन तलाक दिलवाकर वसीम की दूसरी शादी करा दी गई। घटनाक्रम से आहत पीड़िता पक्ष ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के आदेश पर जगदीशपुर थाना में केस दर्ज हुआ और घटना की अवधि 27 नवंबर से 22 दिसंबर 2003 के बीच दर्शाई गई। पुलिस जांच, साक्ष्य संकलन और लंबी न्यायिक सुनवाई की प्रक्रिया से गुजरते हुए मामला अंततः सत्र न्यायालय पहुंचा, जहां अब 23 वर्ष बाद फैसला सुनाया गया।   
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