संवाद सूत्र, देवघर। समर्पण और परंपरा की नगरी देवघर में आज भी कई परंपरा का निर्वहन किया जाता है । इन्हीं परंपराओं के तहत हर वर्ष देवघर के तीर्थ पुरोहित के द्वारा विश्व कल्याण के लिए गोमुख गंगोत्री से जल लेकर पांव पैदल कांवर यात्रा कर बाबाधाम पहुंचते हैं।
गोमुख गंगोत्री समाज के बैनर तले 10 सदस्यों का तीसरा जत्था 1800 किलोमीटर पैदल यात्रा का गोमुख गंगोत्री से बाबा दरबार पहुंचा। इस पैदल यात्रा को तय करते हुए सभी सदस्य 90 दिनों में बाबा दरबार पहुंचे, जहां पर उनका भव्य स्वागत ढोल नगाड़े के साथ एवं गुलाल उड़ाकर किया गया।
गोमुख गंगोत्री से पैदल यात्रा कर पहुंचे भक्त रोहित चरण मिश्र, नंदु नरौने, सेंटी महाराज, विक्की जजवाडे, शंकर खवाडे, राजू झा, बिक्की मिश्रा, सुमन झा, सुमित झा, पिंटु चक्रवती को पुष्पमाला एवं शाल देकर स्वागत किया इस दौरान वहां पर मौजूद लोगों ने गुलाल उड़ाकर धर्म की जय हो... अधर्म का नाश हो... प्राणियों में सद्भावना हो... का जयकारा लगाते हुए, हर हर महादेव का नारा लगाया।
इसके बाद सभी कांवरिया भक्तों ने डढ़वा नदी पर स्थित मां काली का आशीर्वाद लेकर स्वजनों के साथ बाबा मंदिर पहुंचे। जहां पर बाबा मंदिर की परिक्रमा कर बाबा का आशीर्वाद लिया। इस कांवरिया दल की यात्रा के बारे में दल के सदस्य बिक्की मिश्रा ने बताया की यह लगभग 1800 किलोमीटर का पैदल यह यात्रा है, जो हम सभी ने 13 अक्टूबर को शुरू किया था।
यात्रा के दौरान रास्ते में पड़ने वाले मंदिर, मठ एवं स्कूल आदि जगह पर रात्रि विश्राम किया करते थे। वही वे लोग उत्तराखंड होते हुए उत्तर प्रदेश बिहार और फिर झारखंड प्रवेश किया। पूरी यात्रा में लगभग 24 जिला से होते हुए वे लोग देवघर पहुंचे हैं। इस यात्रा की शुरुआत गोमुख गंगोत्री समाज के बैनर तले यह यात्रा 1968 में शुरू की गई थी, जिसका नेतृत्व प्रोफेसर रामबाबू मिश्रा ने किया था।
इसके बाद लगातार पुरोहित समाज के लोग इस यात्रा को जारी रखे हैं। इस यात्रा का उद्देश्य विश्व का कल्याण हो हमारे यजमान एवं उनकी मनोकामना को बाबा बैद्यनाथ व मां पार्वती पूरी करें। यह यात्रा के दौरान यात्री दुर्गम स्थलों से होते हुए गोमुख गंगोत्री से 1800 किलोमीटर बाबाधाम तक पैदल यात्रा करते हैं। |