बिहार में कालाजार उन्मूलन। फाइल फोटो
राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में कालाजार उन्मूलन को औपचारिक मान्यता दिलाने की दिशा में एक अहम पहल की जा रही है। बिहार सरकार कालाजार उन्मूलन से संबंधित एक विस्तृत डोजियर तैयार कर रही है, जिसका वैलिडेशन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से कराया जाएगा। इस डोजियर में राज्य में कालाजार उन्मूलन को लेकर अब तक किए गए सभी महत्वपूर्ण प्रयासों, उपलब्धियों और आंकड़ों को संकलित किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि बिहार ने वर्ष 2022 में ही कालाजार उन्मूलन का लक्ष्य प्राप्त कर लिया था। इसके बावजूद प्रति 10 हजार आबादी पर एक से कम कालाजार रोगी मिलने के मानक के आधार पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणन के लिए डोजियर तैयार करने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी कड़ी में स्वास्थ्य विभाग द्वारा यह विस्तृत डोजियर तैयार किया जा रहा है।
डोजियर में वर्ष 2018 से लेकर 2025 तक कालाजार उन्मूलन के लिए किए गए सभी कार्यों का क्रमबद्ध और साक्ष्य-आधारित विवरण शामिल होंगे। इसमें प्रभावित क्षेत्रों में दवा का छिड़काव, घर-घर जाकर रोगियों की खोज, संदिग्ध मामलों की जांच, पुष्टि होने पर उपचार, तथा त्वचा कालाजार (पीकेडीएल) के रोगियों की पहचान और इलाज से संबंधित आंकड़े दर्ज किए जाएंगे।
इसके साथ ही निगरानी व्यवस्था, प्रशिक्षण कार्यक्रम, सामुदायिक जागरूकता अभियान और स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका का भी उल्लेख किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह डोजियर न केवल राज्य की उपलब्धियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करेगा, बल्कि भविष्य में पुन: संक्रमण की आशंका को रोकने के लिए किए गए प्रयासों को भी रेखांकित करेगा।
डोजियर के तैयार होने के बाद इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन को भेजा जाएगा, जहां विशेषज्ञों द्वारा इसका वैलिडेशन किया जाएगा। वैलिडेशन मिलने के बाद बिहार को कालाजार उन्मूलन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर एक सफल माडल के रूप में मान्यता मिलने की उम्मीद है, जिससे राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को नई पहचान मिलेगी।
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