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झारखंड शराब घोटाला में बड़ी कार्रवाई, प्लेसमेंट एजेंसी के तीनों गिरफ्तार निदेशकों समेत 4 के विरुद्ध चार्जशीट

Chikheang 2026-1-10 20:26:54 views 1241
  

शराब घोटाला मामले में एसीबी ने प्लेसमेंट एजेंसी सहित चार के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल कर दी है।



राज्य ब्यूरो, रांची। शराब घोटाला मामले में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत जांच कर रही एसीबी ने शनिवार को फर्जी बैंक गारंटी पर मैनपावर आपूर्ति का ठेका लेने वाली प्लेसमेंट एजेंसी सहित चार के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल कर दी है।

यह चार्जशीट एसीबी के रांची स्थित विशेष न्यायालय में दाखिल की गई है। अब कोर्ट के संज्ञान के बाद इस मामले में आगे की कोई कार्रवाई होगी।
जिनके विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की गई है, उनमें मेसर्स विजन हास्पिटालिटी सर्विसेज एंड कंस्ल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के अलावा इनके तीन निदेशक परेश अभेसिंह ठाकोर, विक्रमासिंह अभेसिंह ठाकोर व महेश शिडगे शामिल हैं।

पूरा मामला एसीबी रांची थाने में 20 मई 2025 को कांड संख्या 09/2025 में में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा हुआ है। इस केस में उक्त प्लेसमेंट एजेंसी के तीनों ही निदेशक 13 अक्टूबर को गुजरात के अहमदाबाद से गिरफ्तार किए गए थे।

इन पर 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की बाध्यता थी, जिसके आधार पर इनके विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की गई है। चार्जशीट दाखिल नहीं होने पर इन्हें भी डिफाल्ट बेल मिल जाता, जैसा कि पूर्व में मिल चुका है।

प्लेसमेंट एजेंसी विजन हास्पिटालिटी सर्विसेज को हजारीबाग, चतरा और कोडरमा की शराब दुकानों के लिए मैनपावर आपूर्ति का ठेका मिला था। जांच में खुलासा हो चुका है कि इस एजेंसी ने फर्जी बैंक गारंटी पर मैनपावर आपूर्ति का ठेका लिया था।

कंपनी ने 27 अगस्त 2023 को अपने प्रतिनिधि नीरज कुमार के हस्ताक्षर से 5,35,35,241 की बैंक गारंटी जमा कराई। इसके बाद 28 दिसंबर 2023 को कंपनी के निदेशक महेश शिडगे के हस्ताक्षर से दूसरी बैंक गारंटी यह कहते हुए दी गई कि कंपनी में आंतरिक बदलाव हुआ है।

10 जनवरी 2024 को जांच के लिए पत्र लिखा गया, लेकिन उत्पाद विभाग या जेएसबीसीएल की ओर से कोई सत्यापन नहीं किया गया। इस वजह से सरकार को 38 करोड़ से अधिक का नुकसान पहुंचा था।

इस पूरे मामले में मनी लांड्रिंग के तहत जांच कर रही ईडी ने भी पूर्व में इन तीनों ही आरोपितों से रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में जाकर पूछताछ की थी।

एसीबी रांची ने अपनी दर्ज प्राथमिकी में इस बात का जिक्र किया था कि उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे ने अपने पद का दुरुपयोग कर नियमों को ताक पर रखकर मानक को पूरा नहीं करने वाली अपनी मनचाही प्लेसमेंट एजेंसी को मैनपावर आपूर्ति का ठेका दिया, जिससे विभाग को राजस्व का नुकसान पहुंचा।
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