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काशी में बाबा जी लोगों की पूजन पद्धति में व्यवधान पड़ने लगा है, कृपया गृहस्थ लोग श्मशान पर होली खेलने ना आएं

deltin33 1 hour(s) ago views 722
  

वाराणसी मसान होली 2026: गृहस्थों से श्मशान घाट पर न आने की अपील।  



जागरण संवाददाता, वाराणसी। इस बार मसाने की होली पर संकट के बादल स्‍पष्‍ट नजर आने लगे हैं। बुधवार को श्री काशी विश्वनाथ डमरू दल सेवा समिति द्वारा मसान होली को लेकर प्रेस वार्ता में आयोजन को लेकर कुछ बातों को स्‍पष्‍ट क‍ि‍या गया। बताया गया क‍ि कई वर्षों से किया जा रहा है। बुधवार को ओमनाथ शर्मा मोनू बाबा अध्यक्ष, पुनीत पागल कार्यवाहक अध्यक्ष ने आयोजन में गृहस्‍थ लोगों को आने से मना क‍िया गया है।  

इस विशेष अवसर पर नागा साधु, अघोरी अखाड़ा और किन्नर अखाड़े के संत महंत चिता भस्म की होली खेलने के लिए उपस्थित होते हैं। इस आयोजन को देखने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग आते हैं, जिससे बाबा जी की पूजा पद्धति में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। इसलिए, गृहस्थ लोगों से निवेदन है कि वे श्मशान पर होली खेलने के लिए न आएं।

इस बार मसान होली का आयोजन 28 फरवरी 2026, शनिवार को दोपहर 11:30 बजे ब्रह्मनाल सब्जीमडी स्थित बाल भैरव मंदिर से बाबा की पालकी के साथ प्रारंभ होगा। पालकी 12:15 बजे मणिकर्णिका बाबा मसान नाथ की आरती करेगी और इसके बाद 2 बजे गंगा में स्नान के लिए हरिश्चंद्र घाट पर पहुंचेगी। इस यात्रा का समापन एक बजे होगा।

विशेष सूचना के तहत गृहस्थ लोगों से अनुरोध किया गया है कि वे बेवजह श्मशान घाट में न आएं। यदि आप मसान होली में बाबा जी के साथ खेलना चाहते हैं, तो गंगा के उस पार दोपहर 2 बजे से समस्त नागा साधु, अघोरी अखाड़ा और किन्नर अखाड़ा उपस्थित रहेंगे। आप सभी मणिकर्णिका के उस पार आकर संतों को रंग लगाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।  

इस आयोजन का उद्देश्य न केवल धार्मिक आस्था को बढ़ावा देना है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। मसान होली के दौरान, साधु-संतों की उपस्थिति और उनके द्वारा किए जाने वाले अनुष्ठान इस पर्व को विशेष बनाते हैं। यह एक ऐसा अवसर है जब लोग एकत्रित होकर अपने धार्मिक विश्वासों को साझा करते हैं और एक-दूसरे के साथ मिलकर आनंदित होते हैं।

हालांकि, इस वर्ष आयोजकों ने यह सुनिश्चित किया है कि श्मशान घाट पर केवल वही लोग उपस्थित हों जो इस धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा हों। इससे न केवल आयोजन की पवित्रता बनी रहेगी, बल्कि श्रद्धालुओं को भी एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण वातावरण में पूजा करने का अवसर मिलेगा।    
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