आरोपितों के कब्जे से बरामद सिम बाक्स व अन्य अपकरण। दिल्ली पुलिस
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ यूनिट ने साइबर क्राइम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह के तार चीन, नेपाल, कंबोडिया, ताइवान और पाकिस्तान से जुड़े पाए गए हैं। इस मामले में सात जालसाजों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एक ताइवानी नागरिक भी शामिल है। यह गिरोह सिम बाक्स के जरिए देशभर में साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था।
100 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का पता चला
इस सिंडिकेट के जरिए करीब 20 हजार फोन नंबर ऑपरेट हो रहे थे। अब तक एक हजार से ज्यादा शिकायतें सामने आई हैं। शुरुआती जांच में करीब 100 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का पता चला है।
यह गिरोह पीड़ितों पर पहलगाम और दिल्ली विस्फोट जैसे आतंकी हमलों में शामिल होने का झूठा आरोप लगाते थे और तत्काल गिरफ्तारी की धमकी देते हुए डिजिटल अरेस्ट कर मानसिक दबाव बनाकर उनसे मोटी रकम ट्रांसफर करते थे।
इनके कब्जे से 22 सिम बाक्स, आठ मोबाइल फोन, तीन लैपटाॅप, सात सीसीटीवी कैमरे, पांच राउटर, तीन पासपोर्ट, 10 भारतीय सिम और 120 चीन के विदेशी सिम बरामद हुए हैं।
विदेशी कॉल्स को दिखाते थे भारतीय नंबरों जैसा
आईएफएसओ के पुलिस उपायुक्त विनीत कुमार के मुताबिक, बीते वर्ष सितंबर माह से देशभर में पीड़ितों को यूपी एटीएस के अधिकारियों का रूप धारण करने वाले धोखेबाजों के की काॅल्स मिलीं। इन शिकायतों पर अक्टूबर में आईएफएसओ यूनिट ने जांच संभाली। तकनीकी विश्लेषण में पता चला कि आरोपित काॅल को जान-बूझकर 2जी नेटवर्क पर रूट कर रहे थे ताकि लोकेशन ट्रैक न हो सके। सिम बाॅक्स सिस्टम के जरिए विदेशी काॅल्स को भारतीय लोकल नंबरों की तरह दिखाया जा रहा था।
एक ही नंबर कई शहरों में दिखता था एक्टिव
ये काॅल मुख्य रूप से कंबोडिया से आ रही थीं। जांच में यह भी सामने आया कि क्वेक्टेल कंपनी के सिमबाॅक्स डिवाइस में आईएमईआई नंबर ओवरराइट और रोटेट किए जा रहे थे, जिससे एक ही नंबर अलग-अलग शहरों से एक्टिव दिखता था।
इसके बाद एसीपी विजय गहलावत की देखरेख में गठित विशेष टीम ने दिल्ली के गोयला डेरी इलाके में पहला सिम बाॅक्स ठिकाना चिन्हित किया। एक महीने की गुप्त निगरानी के बाद दिल्ली के पांच स्थानों गोयला डेरी, कुतुब विहार, दीनपुर और शाहबाद डेरी से ऑपरेशन का भंडाफोड़ हुआ।
इस दौरान कुतुब विहार, गोयला डेरी के शशि प्रसाद और दीनपुर के परविंदर सिंह को गिरफ्तार किया गया, जो दिल्ली में सिम बाॅक्स के स्थानीय संचालक थे।
ताईवानी नागरिक बेच रहा था सिमबाॅक्स
आगे की जांच में ताईवानी नागरिक आइ-त्सुंग चेन की भूमिका सामने आई, जो सिमबाॅक्स उपकरणों की सप्लाई, इंस्टाॅलेशन और तकनीकी काॅन्फिगरेशन का मास्टरमाइंड था। टीम ने काउंटर-इंटेलिजेंस रणनीति अपनाते हुए उससे एन्क्रिप्टेड चैट जारी रखी और 21 दिसंबर को उसे दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि वह ताइवान स्थित एक बड़े संगठित अपराध नेटवर्क से जुड़ा है, जिसका सरगना शांग-मिन वू बताया गया है।
पूछताछ में आई-त्सुंग चेन ने बताया कि उसने पंजाब के मोहाली में भी एक सिमबाॅक्स सेट स्थापित किया था। टीम ने पंजाब के मोहाली में छापेमारी कर बीटेक इलेक्ट्राॅनिक्स सर्बदीप सिंह और डिप्लोमा धारक जसप्रीत कौर को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से सिमबाक्स, लैपटाप, पासपोर्ट, कंबोडिया रोजगार कार्ड बरामद हुए।
पाकिस्तानी हैंडलर द्वारा किया गया था भर्ती
दोनों आरोपितों से पूछताछ में साइबर अपराध से कहीं आगे फैली अंतरराष्ट्रीय साजिश का पता चला। दोनों ने कुबूल किया कि वे कंबोडिया में संचालित संगठित घोटाला केंद्रों में काम कर चुके हैं। वहां एक पाकिस्तानी हैंडलर ने उन्हें भर्ती कर कट्टरपंथी बनाया। उसके निर्देश पर भारत लौटकर आरोपितों ने पंजाब के मोहाली में अवैध सिम बाक्स हब स्थापित किया, जिससे विदेशी धोखाधड़ी काल भारतीय नेटवर्क में रूट की जाती थीं।
कोयंबटूर, मुंबई तक फैला था नेटवर्क
मोहाली सेटअप के बाद जांच में पता चला कि साइबर अपराधी तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक नया सिम बाक्स सेटअप स्थापित करने की प्रक्रिया में हैं। इसकी भी पहचान कर एक आरोपित को गिरफ्तार किया गया, जिसकी पहचान दिनेश कुमार के रूप में हुई।
पूछताछ में बताया कि उसने वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया और कंबोडिया की कई अंतरराष्ट्रीय यात्राएं कीं और बड़े पैमाने पर ठगी की गई धनराशि को वैध बनाने के लिए क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों, फैसिलिटेटर्स और सिंडिकेट के प्रमुख वित्तीय संचालकों के साथ सीधे समन्वय करने के लिए ये यात्राएं की थीं।
उसकी निशानदेही पर मुंबई के मलाड में छापेमारी कर अब्दुस सलाम नामक आरोपित को गिरफ्तार किया गया जो सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर चुका है और उसके कब्जे से सिमबाक्स सेटअप बरामद हुआ।
नेपाल में बनाया था कमांड सेंटर, कंबोडिया से गुर्गों को देते थे ट्रेनिंग
आगे की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि पूरे सिम बाक्स माॅड्यूल को वर्तमान में नेपाल से संचालित एक विदेशी-आधारित नेटवर्क द्वारा समर्थन और रिमोट निर्देश दिए जा रहे थे। नेपाल में स्थित यह गिरोह विदेशी समूहों के संरक्षण में कार्य कर रहा है, जो फंडिंग, तकनीकी मार्गदर्शन और परिचालन कवर उपलब्ध कराता है, जो मुख्य साजिशकर्ताओं को भारतीय अधिकार क्षेत्र से बाहर रखते हुए भारत में स्थापित सिमबाॅक्स इकाइयों पर रियल-टाइम नियंत्रण बनाए रखा जा सके।
जांच में पता चला कि कंबोडिया का उपयोग प्रशिक्षण और भर्ती केंद्र के रूप में किया गया, जहां ऑपरेटरों को संगठित घोटाला केंद्रों में शामिल किया गया। सिमबाॅक्स हार्डवेयर और तकनीकी आर्किटेक्चर की आपूर्ति व काॅन्फिगरेशन चीनी नागरिकों द्वारा की गई। पाकिस्तानी हैंडलरों ने फंडिंग, आईएमईआई में हेरफेर और पहचान छिपाने की तकनीकों में भूमिका निभाई, जबकि नेपाल वर्तमान में पूरे नेटवर्क का प्रमुख परिचालन तंत्रिका केंद्र बनकर उभरा है। नेपाल से ही भारतीय में बैठे ग्राउंड ऑपरेटरों को निर्देशित किया जा रहा था।
क्या होता है सिमबाॅक्स?
सिमबाॅक्स एक ऐसा डिवाइस है जिसे एक साथ सैकड़ों सिमकार्ड रखने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय काॅल को लोकल काॅल के तौर पर रूट करने के लिए किया जाता है। इससे टेलीकाम चार्ज और रेगुलेटरी नियमों से बचा जा सके। बरामद किए गए सिमबाॅक्स का इस्तेमाल फिशिंग काॅल, फर्जी लोन ऑफर और धोखाधड़ी वाली निवेश योजनाओं वाले बल्क एसएमएस मैसेज भेजने के लिए किया जाता था। आरोपितों ने काॅल और मैसेज के सोर्स को छिपाकर एजेंसियों के लिए इन घोटालों का पता लगाना मुश्किल बना दिया था।
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