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लोहड़ी से जुड़ी मान्यताएं (AI Generated Image)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। लोहड़ी को लाल लोई के नाम से जाना जाता है, जो पंजाब का एक मुख्य पर्व है। लोहड़ी (Lohri 2026) मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाई जाती है। पंजाब के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों जैसे हरियाणा, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश आदि में भी इस पर्व को बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है।
नवविवाहित जोड़ों की पहली लोहड़ी
नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशुओं के लिए लोहड़ी को बहुत ही खास माना जाता है, क्योंकि इस दिन को नई शुरुआत, सौभाग्य, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। जब कोई नवविवाहित जोड़ा पहली बार लोहड़ी मनाता है, तो इसका उत्साह अलग होता है। इस मौके पर परिवार के लोग नए जोड़े को आशीर्वाद, उपहार और शुभकामनाएं देते हैं व उनके अच्छे भविष्य के लिए कामना करते हैं। इससे रिश्तों में प्यार और एकता बनी रहती है।
(Picture Credit: Freepik)
नवजात शिशुओं के लिए इसलिए है खास
वहीं जब लोहड़ी या उसके आसपास घर में किसी नवजात शिशु का जन्म होता है, तो इसे भी एक शुभ संकेत के रूप में देखा जाता है। ऐसे में पहली लोड़ही पर बड़े ही प्यार व उत्साह के साथ नए सदस्य का स्वागत किया जाता है। इस खास मौके पर परिवार के लोग व रिश्तेदार बच्चे को नए कपड़े, खिलौने और मिठाई आदि उपहार के रूप में देते हैं। साथ ही उसे ढेर सारा आशीर्वाद भी देते हैं।
लोहड़ी का महत्व (Lohri Significance)
लोहड़ी का त्योहार केवल एक पारंपरिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का भी पर्व है, क्योंकि यह पर्व फसलों की कटाई और बुवाई से जुड़ा है। उत्तर भारत, विशेषकर पंजाब और हरियाणा में, इस पर्व की विशेष धूम देखने को मिलती है।
(AI Generated Image)
साथ ही यह दिन जीवन में नई ऊर्जा के आगमन का प्रतीक भी माना गया है। क्योंकि यह समय सर्दियों की विदाई और दिनों के लंबे होने की शुरुआत का संकेत देता है। इस दिन पर किसान अपनी अच्छी फसल के लिए अग्नि देव और प्रकृति को धन्यवाद देते हैं और आने वाले वर्ष में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
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