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Operation Elephant: मासूम के शव के पास पहरा दे रहा है हमलावर हाथी, एक्सपर्ट भी घायल, पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील

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जागरण संवाददाता, चाईबासा। झारखंड-ओडिशा सीमा पर स्थित मझगांव प्रखंड के बेनीसागर क्षेत्र में एक हाथी ने पिछले एक सप्ताह से दहशत मचा रखी है। शुक्रवार को इस खूंखार हाथी ने दो और ग्रामीणों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया।   जिससे एक सप्ताह के भीतर हाथी के हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 21 (19 पिछले और 2 आज) तक पहुंच गई है। फिलहाल हाथी को बेनीसागर के तिलोकुटी गांव के पास एक छोटे से जंगल में घेर लिया गया है।   
आज की घटना: बच्चे को उठाकर ले गया जंगल शुक्रवार सुबह जंगली हाथी हाटगमरिया के रास्ते खैरपाल होते हुए घोड़बंदा-बेनीसागर पहुंचा। हाथी को देखने के लिए जुटी भीड़ पर अचानक गजराज ने हमला कर दिया।    इस हमले में 40 वर्षीय प्रकाश मालवा की मौके पर ही मौत हो गई। हृदय विदारक स्थिति तब बनी जब हाथी एक मासूम बच्चे को उठाकर अपने साथ जंगल के अंदर ले गया, जहां उसकी भी जान चली गई।    बताया जा रहा है कि हाथी अभी भी बच्चे के शव के आसपास ही मंडरा रहा है, जिससे रेस्क्यू टीम वहां तक नहीं पहुंच पा रही है।   
एक्सपर्ट भी चपेट में आए, बंगाल और गुजरात की टीमें तैनात हाथी को काबू करने के लिए वन विभाग ने बंगाल के बांकुड़ा से विशेषज्ञों को बुलाया है। रेस्क्यू के दौरान जब एक्सपर्ट सुखलाल बेहरा हाथी के करीब जाने की कोशिश कर रहे थे, तभी हाथी ने उन्हें दौड़ाकर अपनी चपेट में ले लिया।    ग्रामीणों के शोर मचाने के कारण हाथी पीछे हटा, जिससे सुखलाल की जान तो बच गई, लेकिन वे गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। उन्हें बेहतर इलाज के लिए ओडिशा के ररुआं अस्पताल में भर्ती कराया गया है।  

वर्तमान में मौके पर झारखंड, ओडिशा के साथ-साथ गुजरात के \“वनतारा\“ की एक्सपर्ट टीम भी मौजूद है। हाथी को ट्रेंकुलाइज (बेहोश) करने के लिए जेसीबी मशीन का सहारा लेकर जंगल में घेराबंदी की जा रही है।   
इलाके में \“रेड अलर्ट\“: ओडिशा मुख्य सड़क बंद हाथी के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने झारखंड-ओडिशा मुख्य मार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया है। आसपास के गांवों को खाली करा दिया गया है और धारा 144 जैसी स्थिति बनी हुई है।    मझगांव थाना पुलिस और अंचल अधिकारी मौके पर कैंप कर रहे हैं ताकि बढ़ती भीड़ को हाथी के पास जाने से रोका जा सके। वन विभाग की प्राथमिकता सूर्यास्त से पहले हाथी को काबू में करने की है, क्योंकि अंधेरा होने के बाद यह मिशन और भी चुनौतीपूर्ण और जानलेवा हो सकता है।   वन क्षेत्र पदाधिकारी जितेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि वन विभाग की संबंधित मेडिकल टीम मौके पर पहुंच चुकी है। स्थिति को देखते हुए, यदि आवश्यक हुआ तो हाथी को ट्रेंकुलाइज (बेहोश) किया जाएगा।   इस विशेष अभियान के लिए दलमा, जमशेदपुर, नोवामुंडी और हाटगमरिया की टीमों के साथ-साथ बंगाल के विशेषज्ञ और क्यूआरटी (QRT) दल भी तैनात हैं।

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