प्रदूषण को लेकर सरकार ने उठाया बड़ा कदम। (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पर्यावरण की दिशा में भारत ने एक जरूरी कदम उठाया है। इससे विदेशी सर्टिफिकेशन सिस्टम पर निर्भरता कम हो जाएगी। भारत ने CSIR-नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी (NPL) में दुनिया की दूसरी नेशनल एनवायरनमेंटल स्टैंडर्ड लेबोरेटरी (NESL) स्थापित की है। फिलहाल ऐसी लैब सिर्फ ब्रिटेन में है।
यह लेबोरेटरी देश में वायु प्रदूषण मॉनिटरिंग उपकरणों के लिए टेस्टिंग और कैलिब्रेशन सुविधाएं विकसित करेगी। फिलहाल, भारत में वायु प्रदूषण मॉनिटरिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर उपकरण इम्पोर्ट किए जाते हैं।
वैज्ञानिकों का क्या कहना है?
हालांकि, ये इम्पोर्टेड इंस्ट्रूमेंट्स यूरोप या अमेरिका में सर्टिफिकेट जारी करने वाले देशों की पर्यावरणीय स्थितियों के आधार पर इंटरनेशनल एजेंसियों से प्रोडक्शन सर्टिफिकेशन के साथ आते हैं। CSIR-NPL के वैज्ञानिकों ने बताया कि क्योंकि उन देशों की पर्यावरणीय स्थितियां भारत में मौजूद स्थितियों से बहुत अलग हैं, इसलिए भारतीय परिस्थितियों में लंबे समय तक काम करने वाले इंस्ट्रूमेंट से होने वाले माप की क्वालिटी पर असर पड़ता है।
जितेंद्र सिंह ने किया उद्घाटन
केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को CSIR-NPL (मेट्रोलॉजी के लिए सर्वोच्च संस्थान और भारत के राष्ट्रीय मानकों के संरक्षक) के 80वें स्थापना दिवस समारोह में NESL का उद्घाटन किया। यह अब न सिर्फ अलग-अलग पर्यावरणीय स्थितियों से होने वाली गड़बड़ी से निपटेगा, बल्कि मानकीकृत निगरानी उपकरणों के निर्माण में भी मदद करेगा।
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