मृतकों की फाइल फोटो।
जागरण संवाददाता, श्री माछीवाड़ा साहिब। माछीवाड़ा के गांव भट्टियां में मौजूद एक फैक्ट्री में आज शुक्रवार सुबह दो नौजवानों की लाशें कैंटर के कैबिन में संदिग्ध हालत में पड़ी मिलीं। शक्क है कि उन्होंने ठंड से बचने के लिए कोयला डालकर अंगीठी जलाई थी, जिसकी गैस से दम घुटने से उनकी मौत हो गई।
फैक्ट्री के सिक्योरिटी सुपरवाइजर गुरप्रीत सिंह ने बताया कि यह कैंटर 5 जनवरी को फैक्ट्री में रिफाइंड तेल लेने आया था, जिसके ड्राइवर का नाम छोटू वासी गांव डूंगरांवाला, तहसील खेरागढ़ (यु.पी.) जबकि उसके साथी का नाम श्री भगवान वासी गांव मेहता, जिला भरतपुर (राजस्थान) है, जो रिश्ते में फूफा-भतीजा लगते हैं। आज जब वे दोनों कैबिन में मृतक मिले, तो तुरंत पुलिस को बताया गया।
मौके पर पहुंचे थाना मुखी पवित्र सिंह ने बताया कि फैक्ट्री प्रबंधकों के मुताबिक ये दोनों युवक खाना खाने के बाद कैंटर के कैबिन में सोए थे और ठंड से बचने के लिए उन्होंने कोयले डालकर अंगीठी जलाई थी। शुरुआती जांच में यह बात सामने आ रही है कि कोयले की अंगीठी से निकली गैस की वजह से उनका दम घुट गया और उनकी मौत हो गई।
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फोरेंसिक टीम ने असली वजह तलाशने में जुटी
थाना मुखी के मुताबिक फोरेंसिक टीम को बुलाया गया है जो पूरे मामले की जांच कर मौत के असली कारणों का पता लगाएगी। पुलिस के मुताबिक दोनों के परिवार वालों को बता दिया गया है और वे आज दोपहर तक माछीवाड़ा थाना पहुंच जाएंगे। उन्होंने कहा कि पुलिस शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजेगी, जिसके बाद मौत के कारणों का पता चलेगा।
कैबिन में पड़े दोनों शवों के पास से कोयले की अंगीठी भी मिली है, जिसकी गैस की वजह से उन्हें उल्टी हुई थी, लेकिन गैस इतनी जहरीली थी कि उन्हें दरवाजा खोलने का मौका भी नहीं मिला। यह भी बताया गया है कि दोनों रिश्ते में फूफा-भतीजा हैं।
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ड्राइवर छोटू परिवार का अकेला कमाने वाला था
आज माछीवाड़ा निक्ट हुए दुखद हादसे में जहरीली गैस से दो लोगों की मौत हो गई। इनमें मृतक श्री भगवान, जिसकी डेढ़ साल पहले शादी हुई थी और जब उसकी पत्नी को फोन पर खबर मिली कि वह अब जिंदा नहीं रहा तो उसका रो-रो कर बुरा हाल था। दूसरा मृतक ड्राइवर छोटू परिवार का अकेला कमाने वाला था क्योंकि उसके पिता की मौत हो चुकी है और उसकी पत्नी के अलावा उसके दो छोटे बच्चे थे।
यह भी बताया गया है कि उसका एक भाई है जो अंधा है और छोटू की कमाई से ही पूरे परिवार का गुजारा होता था। उनकी मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और उनके दो छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया।
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