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AIIMS Rishikesh में डॉक्‍टरों का चमत्‍कार, हार्ट के वाल्व में थी लीकेज; बिना सर्जरी किया इलाज

deltin33 2026-1-9 13:26:58 views 1069
  

मोहनपुर जट गांव के रहने वाले 65 वर्षीय जगत वीर सिंह को मिला नया जीवन। जागरण



जागरण संवाददाता, ऋषिकेश । एम्स ऋषिकेश के चिकित्सकों ने 65 वर्षीय ऐसे व्यक्ति का जीवन बचाया है, जिनके हृदय के वाल्व में लीकेज होने के कारण हृदय की पंपिंग क्षमता मात्र 20 प्रतिशत रह गई थी। वाल्व खराब होने के कारण बुजुर्ग ओपन हार्ट सर्जरी करवाने की स्थिति में भी नहीं थे। ऐसे में कार्डियोलाजिस्ट विशेषज्ञों ने अत्याधुनिक तकनीक ट्रांसकैथेटर एज-टू-एज रिपेयर (टीईईआर) की तकनीक से वाल्वों की लीकेजे दूर की। बुजुर्ग अब स्वस्थ हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

बुजुर्ग रोगी तहसील रुड़की के मोहनपुर जट गांव के रहने वाले हैं। इलाज के बाद 65 वर्षीय जगत वीर सिंह ने बताया कि वर्ष 2023 में उनके हृदय में स्टंट पड़े थे। पिछले कुछ महीनों से उनकी फिर से सांस फूलने लगी और वह चलने-फिरने में भारी दिक्कतों का सामना कर रहे थे। उन्होंने बताया कि हरिद्वार के विभिन्न चिकित्सालयों ने उनके हृदय के माइट्रल वाल्व में गंभीर लीकेज होना और तत्काल सर्जरी की आवश्यकता बताई। उम्र ज्यादा होने और पहले भी हार्ट की सर्जरी होने के कारण मामला जोखिम भरा था। एम्स में कार्डियोलाजी विभाग के चिकित्सकों ने टीईईआर विधि से उनका इलाज किया। इलाज के बाद रोगी को तीन दिन पहले अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।  

बीस प्रतिशत रह गई थी क्षमता
एम्स के कार्डियोलाजिस्ट एडिशनल प्रो. बरुण कुमार ने बताया कि रोगी के हृदय के माइट्रल वाल्व में गंभीर लीकेज (सीवियर माइट्रल रिगर्जिटेशन) होने के साथ ही उनके हृदय की पम्पिंग क्षमता मात्र 20 प्रतिशत रह गई थी। जबकि सामान्य तौर पर यह 60 प्रतिशत रहती है। इस इन्टरवेंशनल तरीके से इलाज की यह प्रक्रिया बिना सर्जरी के की जाती है। इस प्रक्रिया में ट्रांसकैथेटर एज-टू-एज रिपेयर (टीईईआर) तकनीक का इस्तेमाल किया गया। टीम में प्रो. बरुण के अलावा कार्डियोलाजिस्ट डा. सुवेन कुमार, वरिष्ठ सर्जन डा. अंशुमान दरबारी, एनेस्थेसिया के डा. अजय कुमार शामिल रहे।

क्या है टीईईआर तकनीक
इस प्रक्रिया में बिना छाती खोले, जांघ की रक्त नली के माध्यम से एक छोटी क्लिप हृदय तक पहुंचायी जाती है, जो माइट्रल वाल्व के लीकेज वाले हिस्सों को आपस में जोड़कर रक्त के उल्टे प्रवाह को काफी हद तक कम कर देती है। इससे हृदय की कार्यक्षमता में सुधार होता है और सांस फूलने, थकान तथा दैनिक गतिविधियों में कठिनाई जैसे लक्षणों में व्यक्ति को उल्लेखनीय राहत मिलती है।  


यह उपलब्धि संस्थान में मौजूद अत्याधुनिक, विश्वस्तरीय हृदय रोग उपचार सुविधाओं को दर्शाती है। अब जटिल हृदय रोगों का इलाज बिना ओपन हार्ट सर्जरी के भी सफलतापूर्वक संभव है। टीम में शामिल सभी चिकित्सकों ने प्रशंसनीय कार्य किया है। - प्रो. मीनू सिंह, कार्यकारी निदेशक एम्स ऋषिकेश

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