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माता पार्वती ने मणिकर्णिका घाट को क्यों दिया था श्राप, जिस कारण कभी शांत नहीं होती यहां की अग्नि

Chikheang Yesterday 12:27 views 1004
  

मणिकर्णिका घाट को क्यों मिला था श्राप (AI Generated Image)  



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत में ऐसे कई प्रसिद्ध स्थान है, जिन्हें लेकर अपनी-अपनी मान्यताएं हैं। उत्तर प्रदेश का वाराणसी या बनारस शहर अपने आप में इतिहास लिए हुआ है। यह विशेष के सबसे प्राचीन शहरों में से एक है, जो सांस्कृतिक रूप से भी काफी समृद्ध है। गंगा नदी के तट पर बसा यह शहर, हिन्दू धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों में से भी एक है। आज हम आपको बनारस में ही स्थित मणिकर्णिका घाट (Manikarnika Ghat) से जुड़ी एक पौराणिक कथा बताने जा रहे हैं।
इस लिए पड़ा मणिकर्णिका घाट

एक प्रचलित कथा के अनुसार, माता पार्वती ने मणिकर्णिका घाट को एक श्राप दिया था। इस कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वता और भगवान शिव इस घाट पर स्नान के लिए पहुंचे। घाट पर स्नान करते समय माता पार्वती की कान की मणि यानी आभूषण कहीं गिर गया। शिव जी के बहुत ढूंढने के बाद भी वह नहीं मिली।

  

इससे माता पार्वती बहुत क्रोधित हो गईं और उन्होंने घाट को यह श्राप दिया की यह घाट हमेशा जलता रहेगा। तभी से यह मान्यता चली आ रही है कि मणिकर्णिका घाट की अग्नि कभी शांत नहीं होती। इस स्थान पर माता पार्वती की मणिकर्णिका अर्थात कान की बाली खोने के कारण इसका नाम मणिकर्णिका घाट पड़ा।
मणिकर्णिका घाट का महत्व

मणिकर्णिका घाट एक महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित घाट है, जो हिंदू धर्म के सबसे पवित्र श्मशान घाटों में से भी एक माना गया है। मणिकर्णिका घाट को (Manikarnika Ghat) मोक्षदायनी घाट और महाश्मशान के नाम से भी जाना जाता है।

  

Picture Credit: Freepik) (AI Image)

ऐसी मान्यता है कि अगर किसी व्यक्ति का अंतिम संस्कार इस घाट पर किया जाए, तो उसे जन्म और मृत्यु के चक्र से छुटकारा मिल जाता है। साथ ही यह घाट जीवन और मृत्यु के चक्र का प्रतीक भी है, जो जीवन की क्षणभंगुरता यानी नश्वरता की याद दिलाता रहता है।

Sourace - https://kashi.gov.in/listing-details/manikarnika-ghat

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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