चम्पाई सोरेन और हेमंंत सोरेन। (फाइल फोटो)
जागरण संवाददाता, मैथन (धनबाद)। पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने पेसा कानून को आदिवासी परंपरा और ग्राम सभा की मूल भावना के विरुद्ध बताया है। उन्होंने कहा कि यह कानून आदिवासी समाज के साथ धोखा है और इसके लागू होने से आदिवासियों की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को कमजोर किया गया है। गुरुवार को जामताड़ा जाने के क्रम में मैथन पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री ने मैथन डैम स्थित गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बातें कहीं।
चम्पाई सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज की प्राचीन परंपरा में राज्यपाल की विशेष भूमिका रही है, लेकिन पेसा कानून के तहत राज्यपाल व्यवस्था को कमजोर कर शक्तियां उपायुक्त के हाथ में सौंप दी गई हैं। इससे आदिवासियों का भला नहीं बल्कि नुकसान होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत व्यवस्था में बिचौलियों को शामिल कर ग्राम सभा को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है, ताकि आदिवासियों की आवाज दबाई जा सके।
उन्होंने कहा कि पेसा कानून के माध्यम से सीएनटी और एसपीटी जैसे सुरक्षा कानूनों को भी कमजोर किया गया है। ये कानून आदिवासियों की जमीन, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए बनाए गए थे, लेकिन वर्तमान सरकार इन्हें निष्प्रभावी कर आदिवासियों के शोषण का रास्ता खोल रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पेसा कानून आदिवासियों की सुरक्षा नहीं करेगा, बल्कि उनके शोषण का माध्यम बनेगा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सत्तारूढ़ दलों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और राजद ने हमेशा आदिवासियों को ठगने का काम किया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को आदिवासियों की कोई चिंता नहीं है और वे केवल सत्ता में बने रहने के लिए अधिकारियों के हाथों की कठपुतली बने हुए हैं। अधिकारी अपने निजी स्वार्थ के लिए आदिवासियों के अधिकारों का हनन कर रहे हैं।
इससे पूर्व भाजपा मैथन मंडल के कार्यकर्ताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन का स्वागत गुलदस्ता भेंट कर किया। वे जामताड़ा जाने के क्रम में कुछ देर के लिए मैथन डैम स्थित गेस्ट हाउस में रुके थे, जहां कार्यकर्ताओं ने उनसे मुलाकात कर नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। मौके पर भाजपा के धीरज सिंह सहित कई अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।
क्या है पेसा कानून
पेसा (PESA-Panchayats Extension to Scheduled Areas Act, 1996) कानून अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासियों को ग्राम सभा के माध्यम से स्वशासन का अधिकार देने के लिए बनाया गया है। इसका उद्देश्य आदिवासियों की जमीन, जंगल, जल और संस्कृति की रक्षा करना है। इस कानून के तहत ग्राम सभा को विकास योजनाओं, प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय प्रशासन में अहम भूमिका दी जाती है। |