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MP में डूब प्रभावित किसानों का अनूठा प्रदर्शन, पत्ते लपेटकर सड़क पर उतरे, कहा- सरकार हमें आदिमानव बनाने पर तुली

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पत्ते लपेटकर प्रदर्शन करते किसान।  



डिजिटल डेस्क, इंदौर। बुरहानपुर जिले की मध्यम सिंचाई पांगरी बांध परियोजना से प्रभावित किसान बीते तीन वर्षों से उचित मुआवजे की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं, लेकिन अब तक उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं आया। किसान हितैषी होने का दावा करने वाली सरकार ने न तो उनसे संवाद किया और न ही उनकी समस्याओं के समाधान की कोई ठोस पहल की।
आदिमानव बनकर जताया विरोध

गुरुवार को इन किसानों ने एक बार फिर अनोखे और प्रतीकात्मक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। किसानों ने खुद को ‘आदिमानव’ के रूप में प्रस्तुत करते हुए निर्वस्त्र शरीर पर केले के पत्ते लपेटे और नारेबाजी कर सरकार को जगाने का प्रयास किया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे रवि पटेल ने कहा कि जब तक प्रभावित किसानों को उनका हक और उचित मुआवजा नहीं मिलता, तब तक यह आंदोलन खत्म नहीं होगा।
जिले में मंत्री मौजूद, फिर भी किसानों से दूरी

उल्लेखनीय है कि इसी दिन प्रदेश के जल संसाधन मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट बुरहानपुर प्रवास पर थे। इसके बावजूद उन्होंने न तो किसानों से बातचीत की और न ही उनकी पीड़ा जानने की कोशिश की। किसान नेताओं का आरोप है कि मंत्री केवल भाजपा कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर लौट गए, जिससे किसानों में गहरा आक्रोश है।
दोगुने मुआवजे की मांग

रवि पटेल ने बताया कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण पर किसानों को दोगुना मुआवजा और पुनर्वास का अधिकार है। इसी मांग को लेकर किसान सरकार के सामने खड़े हैं।

आंदोलन के दौरान किसानों ने कमर में केले के पत्ते और सिर पर सागौन के पत्ते बांधकर प्रतीकात्मक रूप से यह संदेश दिया कि सरकार उन्हें आदिमानव बनाकर छोड़ देना चाहती है। उनका कहना है कि सरकार मानो यह मान बैठी है कि किसानों को न स्वास्थ्य चाहिए, न शिक्षा और न ही रोटी, कपड़ा और मकान।

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‘राइट टू लाइफ विद डिग्निटी’ का हवाला

डॉ. रवि पटेल ने कहा कि यह आंदोलन किसानों के मौलिक अधिकार ‘राइट टू लाइफ विद डिग्निटी’ से जुड़ा है। संविधान के अनुच्छेद 300-ए के तहत भूमि पर किसानों का संवैधानिक अधिकार सुरक्षित है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों के अनुसार बिना पारदर्शिता और उचित मुआवजे के सरकार किसानों की जमीन जबरन नहीं ले सकती।
उग्र आंदोलन की चेतावनी

किसानों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है, लेकिन यदि सरकार का रवैया नहीं बदला तो वे उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे। इस प्रदर्शन के जरिए किसानों ने अपनी पीड़ा, सच्चाई और अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। आंदोलन में नंदू पटेल, संजय चौकसे, माधो नाटो, बद्री वास्कले, मान्या भिलावेकर, मामराज, नवल भाई, राहुल राठौर, शालिग्राम भिलावेकर सहित बड़ी संख्या में किसान शामिल रहे।
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