अमेरिका ने जारी की नई डाइट गाइडलाइंस।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग ने बुधवार को अमेरिकियों के लिए अपनी नई डाइट गाइडलाइंस जारी कीं। इसमें प्रोसेस्ड फूड, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, पेट्रोलियम-आधारित फूड कलर पर रोक लगाने और हेल्दी फैट, साबुत अनाज और प्रोटीन पर ध्यान देने की बात कही गई है।
ट्रंप प्रशासन की ओर से जारी एक फैक्ट शीट में इसे दशकों में संघीय पोषण नीति में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव कहा गया है। नई गाइडलाइंस में अमेरिकियों से हाई-क्वालिटी, पोषक तत्वों से भरपूर प्रोटीन वाले खाने को प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया है।
अमेरिकियों की डाइट पर क्या-क्या?
अंडे, पोल्ट्री, सीफूड और रेड मीट, बीन्स, मटर, दाल, फलियां, नट्स, बीज और सोया से मिलने वाले प्लांट-बेस्ड प्रोटीन की सलाह दी गई है। वेजिटेरियन और वीगन लोगों के लिए प्लांट-बेस्ड प्रोटीन लेने के लिए कहा गया है, लेकिन इस बात पर जोर दिया गया कि इससे कुछ न्यूट्रिएंट्स की कमी हो सकती है इसलिए सप्लीमेंट लेना जरूरी है।
ट्रंप प्रशासन ने स्टार्च और एक्स्ट्रा चीनी कम खाने की सलाह दी है। नमक, मसालों और जड़ी-बूटियों से फ्लेवर देने और डीप-फ्राइंग के बजाय बेकिंग, ब्रॉइलिंग, ग्रिलिंग, रोस्टिंग या स्टिर-फ्राइंग से खाना बनाने की सलाह दी गई है।
डेरी प्रोडक्ट
गाइडलाइंस में कहा गया है कि अमेरिकियों को बिना एक्स्ट्रा चीनी वाले फुल-फैट डेयरी प्रोडक्ट्स खाने चाहिए। हर दिन तीन ऐसे प्रोडक्ट्स खा सकते हैं।
फ्रूट्स और सब्जियां
सलाह दी गई है कि फल और सब्जियां अपने असली रूप में खाई जाएं। हालांकि फ्रोजन, सूखे और डिब्बाबंद प्रोडक्ट, जिनमें बहुत कम या फिर बिल्कुल भी चीनी नहीं मिलाई गई हो वे भी ठीक हो सकते हैं।
हेल्थी फैट पर ध्यान
ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि ट्रंप प्रशासन ज्यादा सैचुरेटेड फैट्स खाने की सलाह देंगे, लेकिन प्रशासन ने इसे हाई कोलेस्ट्रॉल और हार्ट अटैक और स्ट्रोक के बढ़ते खतरे से जोड़ा है। हालांकि, नई गाइडेंस में पिछली सलाह को दोहराया गया है कि इसका सेवन कुल डेली कैलोरी के 10% से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
इसमें मीट, पोल्ट्री, अंडे, ओमेगा-3 से भरपूर सीफूड, नट्स, बीज, फुल-फैट डेयरी, जैतून और एवोकाडो को हेल्दी फैट्स का सोर्स बताया गया है और खाना पकाने के लिए जैतून के तेल को सबसे अच्छा बताया गया है। मक्खन और बीफ टैलो को दूसरे ऑप्शन के तौर पर लिस्ट किया गया है।
फाइबर से भरपूर अनाज पर जोर
फाइबर से भरपूर साबुत अनाज जैसे साबुत गेहूं, ओट्स/ओटमील, ब्राउन राइस, साबुत मक्का, क्विनोआ और जौ शामिल हैं, जबकि रिफाइंड कार्ब्स इससे बाहर हैं। रिफाइंड कार्ब्स, जैसे कि सफेद ब्रेड, सफेद चावल, रेगुलर पास्ता, मीठे सीरियल, पेस्ट्री, केक और कुकीज, जल्दी पच जाते हैं क्योंकि उनमें से फाइबर और पोषक तत्व निकाल दिए जाते हैं। नतीजतन ब्लड शुगर में तेजी से बढ़ोतरी और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।
RFK जूनियर लंबे समय से UPF और सिंथेटिक रंगों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं, जिनका इस्तेमाल कैंडी, सोडा और अनाज में रंग बढ़ाने के लिए किया जाता है। उनका दावा है कि ये बच्चों में पुरानी बीमारियों और हाइपरएक्टिविटी का एक बड़ा कारण हैं। नई गाइडलाइंस में खास तौर पर आर्टिफिशियल फ्लेवर, पेट्रोलियम-बेस्ड रंग, आर्टिफिशियल प्रिजर्वेटिव और कम कैलोरी वाले नॉन-न्यूट्रिटिव स्वीटनर का जिक्र किया गया है।
एल्कोहल के बारे में क्या?
नई गाइडलाइंस में शराब कम पीने की सलाह दी गई है। पिछले साल पूर्व सर्जन जनरल विवेक मूर्ति के ऑफिस ने बताया था कि शराब पीने से कम से कम सात तरह के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
वहीं, सेंटर्स फॉर मेडिकेयर एंड मेडिकेड सर्विसेज के एडमिनिस्ट्रेटर डॉ. मेहमत ओज ने इस बात पर जोर दिया कि फेडरल अधिकारी पूरी तरह से छोड़ने के बजाय कम मात्रा में पीने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि शराब सोशल रिलेशनशिप को बेहतर बनाती है, जिसके सेहत पर अच्छे असर हो सकते हैं।
नई गाइडेंस इस बात पर जोर देती है कि हाइड्रेशन पूरी हेल्थ में एक जरूरी फैक्टर है और पानी, बिना मीठे वाले ड्रिंक्स, सोडियम (हर दिन 2,300 mg से कम) और इलेक्ट्रोलाइट्स लेने की सलाह देती है।
यह भी पढ़ें: वीरान स्कूल, बंद रेस्तरां और बेहाल अस्पताल; क्या \“जीरो इमिग्रेशन\“से अपना ही गला घोंट रहा है अमेरिका? |