स्कूल में आवारा कुत्ते दिखे तो प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई
जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। सरकारी स्कूलों में नौनिहालों को अब आवारा कुत्तों के खौफ के बीच नहीं पढ़ना होगा। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूलों में कुत्तों के प्रवेश को रोकने और बच्चों की सुरक्षा के लिए मानक संचालन प्रक्रिया जारी कर दी है।
विभाग ने स्पष्ट निर्देश है कि अगर किसी स्कूल में मिड डे मील के अपशिष्ट या जूठन के कारण कुत्ते पाए गए, तो इसके लिए सिर्फ रसोइया नहीं, बल्कि प्रधानाध्यापक, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी संयुक्त रूप से जिम्मेदार माने जाएंगे।
प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में जिले को पत्र भेजकर तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया है। पत्र में कहा गया है कि आवारा कुत्तों का स्कूल में घुसना बच्चों के जीवन के अधिकार का उल्लंघन है और इसमें लापरवाही सीधे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना मानी जाएगी।
जूठन ने बढ़ाई है मुसीबत
विभाग ने माना है कि स्कूलों में कुत्तों के आने की सबसे बड़ी वजह मिड डे मील का बचा हुआ खाना और सही तरीके से सफाई न होना है। नई गाइडलाइन के मुताबिक, बच्चों के खाना खाने के 15-20 मिनट के भीतर क्लासरूम, बरामदा और हाथ धोने वाली जगह की सफाई अनिवार्य रूप से करनी होगी।
जूठन या खाद्य अपशिष्ट को खुले में फेंकने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। इसे ढक्कनदार डिब्बों में रखकर स्कूल परिसर के बाहर निर्धारित जगह पर ही निपटाना होगा।
गेट पर लिखा जाएगा-कुत्तों को खाना देना मना
अब स्कूल परिसर के भीतर किसी भी हाल में कुत्तों को खाना खिलाने पर रोक रहेगी। स्कूलों को अपने प्रवेश द्वार पर यह बोर्ड लगाना होगा कि विद्यालय परिसर में भटकते कुत्तों को भोजन देना प्रतिबंधित है। साथ ही, रसोई घर के चारों तरफ जाली या फेंसिंग लगाने का निर्देश दिया गया है ताकि भोजन की गंध से कुत्ते आकर्षित न हो। |
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