जागरण संवाददाता, इटावा। चकरनगर क्षेत्र के विभिन्न गांवों और खेतों के आसपास एक हजार आवारा गोवंशी घूम रहे हैं। ये गोवंशी किसानों के खेतों में खड़ी हरी फसल को मिनटों में चट कर जाते हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही से गोशालाएं खाली पड़ी है।
गोवंशी के आतंक से क्षेत्र की एक हजार एकड़ से भी अधिक भूमि में खड़ी फसल उजड़ चुकी है। जिससे किसान भुखमरी की कगार पर हैं। इस पिछड़े पारपट्टी क्षेत्र में सिर्फ सरकार के आदेशों की सिर्फ खानापूर्ति होती है, पालन नहीं।
नगला कंधेशीघार, नगला कढ़ोरी के आसपास एक सैकड़ा से अधिक गोवंशी घूम रहे हैं, जो आसपास के किसानों का जीना मुश्किल किए हैं। कंधेशीघार की गाेशाला बनाने में लाखों रुपया खर्च तो हुआ, किंतु गोशाला आज तक संचालित नहीं की गई।
यही नहीं क्षेत्र के गांव चकरनगर, मितरौली, जगतौली, डिभौली, ढकरा, राजपुर, छिवरौली, कुंदौल, बछेड़ी, गढ़ाकास्दा, भरेह, पथर्रा, पिपरौली गढ़िया, नदा, मिटहटी, चंद्रहंसपुरा, पसिया, हनुमंतपुरा, सिंडौस, मंगदगढ़ी, चौरेला, बिठौली, नीमरी, कचहरी आदि में लगभग एक हजार से भी अधिक गोवंशी आपको खेतों में खड़ी हजारों की लागत से बोई और खून पसीने से सींची गई फसल को गोवंशी बर्बाद करते मिल जाएंगे।
सबसे अधिक बर्बादी का नजारा चंद्रहंसपुरा, पसिया, पिपरौली गढ़िया, सहसों, नदा आदि में देखने को मिल जाएगा। चंद्रहंसपुरा व पसिया के एक सैकड़ा भूमि में न तो बाजरे की फसल हुई और न गेहूं व सरसों की। यहां किसान बुरी तरह परेशान है।
क्षेत्र में अब तक सिर्फ हरौली बहादुरपुर, नौगावां, ददरा, कंधेशीघार, सहसों, बिडौरी व अनैठा कुल सात गोशाला बनाई गई हैं, जबकि प्रत्येक न्याय पंचायत स्तर पर एक गोशाला बनाई जानी थी।
10 न्याय पंचायत में सिर्फ सात गोशाला ही बनाई गईं उसमें भी छह संचालित है। अब हालात कैसे सुधर सकते है, इस बात का आप खुद ही अंदाजा लगा सकते है। खंड विकास अधिकारी यदुवीर सिंह राजपूत ने बताया कि जो गोशालाएं नहीं चल रही हैं उनको संचालित कराया जाएगा और गोवंशी को पकड़वाया जाएगा।
कंधेशीघार गोशाला हमारी हद पर ही बनी है, आज तक इसमें कभी गोवंशी बंद नहीं किए गए, जबकि सैकड़ों गोवंशी लगातार हमारी फसलें उजड़ रहे हैं, यहां किसान बूरी तरह बर्बाद हो चुका है।
-सर्वेश कुमार, ग्राम कसौआ
यहां कभी एक भी गोवंशी बंद नहीं किए, सौ से अधिक गोवंशियों ने सैकड़ों एकड़ भूमि की फसल नष्ट कर दी, किसान का खाद बीज के पैसे भी दो वर्ष से नहीं लौट रहे हैं।
-लाला सिंह, ग्राम कसौआ |