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कानपुर के LLR हॉस्पिटल में AI आधारित 20 वेंटिलेटर पर इलाज शुरू, मरीज की हालत बिगड़ते ही करता है अलर्ट

deltin33 1 hour(s) ago views 419
  


अंकुश शुक्ल, कानपुर। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) केवल तकनीकी शब्द नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में नई उम्मीद बनकर उभर रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा एआइ को भारत का “भाग्य और भविष्य” बताए जाने का आशय अब अस्पतालों में स्पष्ट दिखने लगा है।   जीएसवीएम मेडिकल कालेज से संबद्ध एलएलआर अस्पताल के मेडिसिन आइसीयू-एचडीयू वार्ड में एआइ आधारित 20 अत्याधुनिक वेंटिलेटर पर गंभीर मरीजों का उपचार इसका उदाहरण हैं। इन वेंटिलेटर में स्थापित एआइ साफ्टवेयर मरीज के बीपी, हृदय गति, सांस लेने की दर, आक्सीजन स्तर जैसे प्रमुख हेल्थ पैरामीटर पर निरंतर नजर रखता है।
सिस्टम तुरंत हो जाता है अलर्ट निर्धारित मानक से जरा भी विचलन होते ही सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करता है, जिससे चिकित्सक समय रहते उपचार में आवश्यक बदलाव कर सकें। परिणामस्वरूप उपचार अधिक सटीक, त्वरित और प्रभावी बन रहा है। गंभीर श्वसन स्थितियों, निमोनिया, सेप्सिस, आघात, सीओपीडी तथा न्यूरोमस्कुलर विकारों से जूझ रहे मरीजों को विशेष लाभ मिल रहा है।        एआइ वार्ड को टेलीमेडिसिन सुविधा से भी जोड़ा गया है। इसके माध्यम से देश के उच्च चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ जांच रिपोर्ट के आधार पर परामर्श दे रहे हैं। जटिल सर्जरी या गंभीर स्थिति में भी विशेषज्ञ राय तत्काल उपलब्ध हो रही है। इससे न केवल उपचार की गुणवत्ता बेहतर हुई है, बल्कि मरीजों और परिजनों को भरोसा भी मिला है कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा सलाह मिल रही है।

अंतिम चरण में AI चिप से 24 घंटे निगरानी की तैयारी   अब आयुष्मान वार्ड में भी 30 बेड के नीचे सेंसर युक्त एआइ चिप लगाकर चौबीसों घंटे निगरानी की तैयारी अंतिम चरण में है। यह व्यवस्था मरीजों के पल्स रेट, बीपी और अन्य स्वास्थ्य संकेतकों पर सतत नजर रखेगी तथा किसी भी असामान्यता पर डाक्टर और नर्सिंग स्टाफ को तुरंत सूचित करेगी।   इससे आकस्मिक जटिलताओं की संभावना घटेंगी और मरीज सुरक्षित वातावरण में उपचार पा सकेंगे। डाक्टर की टीम त्वरित प्रतिक्रिया से मरीज की जांच कर उनके जीवन की रक्षा कर सकेंगे। इसकी शुरुआत मार्च के पहले सप्ताह से करने की तैयारी है।
उपचार प्रक्रिया सरल व व्यवस्थित हुईः प्रो. काला जीएसवीएम मेडिकल कालेज उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा मेडिकल कालेज बन गया है, जहां संबद्ध अस्पताल में एआइ की सहायता से गंभीर मरीजों का उपचार व्यवस्थित रूप से हो रहा है। प्राचार्य प्रो. संजय काला के अनुसार करीब 3.95 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित ये एआइ एडवांस वेंटिलेटर श्वसन क्रिया को रोगी की आवश्यकता के अनुसार अनुकूलित करते हैं और उपचार परिणामों को बेहतर बनाते हैं।   प्रतिदिन तीन से साढ़े तीन हजार ओपीडी मरीजों और औसतन सौ से अधिक भर्ती मरीजों वाले इस अस्पताल में एआइ ने उपचार प्रक्रिया को सरल, व्यवस्थित और समयबद्ध बनाया है। बड़े सड़क हादसों से लेकर गंभीर बीमारियों तक, एआइ तकनीक जीवन बचाने में सक्रिय भूमिका निभा रही है। स्पष्ट है कि यदि तकनीक का सही और संवेदनशील उपयोग हो, तो वह केवल सुविधा नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की मजबूत आधारशिला बन सकती है।
डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ की कमी का असर नहीं  

प्राचार्य डा. संजय काला ने बताया कि एआइ वार्ड के कारण डाक्टर व नर्सिंग स्टाफ की कमी का भी उपचार में कोई असर नहीं पड़ रहा है। सामान्य तौर पर वेंटिलेटर वाले मरीजों की निगरानी के लिए इनकी व्यवस्था अलग से करनी होती है, लेकिन एआइ वेंटिलेटर गंभीर स्थितियों के मरीजों की 24 घंटे डाक्टर व नर्सिंग स्टाफ के बिना निगरानी करते हुए अलर्ट देते हैं।

यह भी पढ़ें- कानपुर के अस्पतालों में मंगलवार को कौन से डॉक्टर उपलब्ध हैं, देखें पूरी सूची इसके लिए कक्ष में केवल तकनीकी जानकार को बैठाकर पूरी रिपोर्ट डाक्टरों तक पहुंच रही है। कई जिलों से रेफर होकर इमरजेंसी में भर्ती होने वाले गंभीर मरीजों को इसका लाभ मिल रहा है। एआइ आधारित 20 वेंटिलेटर मिल जाने के बाद इमरजेंसी में अब आइसीयू बेड की संख्या भी 58 हो गई है।
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