पाकिस्तान और चीन की ओर से संयुक्त रूप से विकसित JF-17 थंडर एक सस्ता मल्टी-रोल फाइटर जेट है। (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दावा किया है कि अगले छह महीनों में पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से कर्ज लेने की जरूरत नहीं होगा।
इसके पीछे उन्होंने बेहद हास्यास्पद वजह बताई है कि मई 2025 में भारत के साथ हुए चार दिन के सैन्य टकराव के बाद पाकिस्तान के JF-17 थंडर फाइटर जेट के ऑर्डर में जबरदस्त उछाल आया है।
आसिफ ने जियो न्यूज पर बातचीत में कहा कि इस संघर्ष की वजह से पाकिस्तान की सैन्य क्षमता के कारण कई देशों ने रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि अगर ये ऑर्डर पूरे हो गए, तो IMF की कोई जरूरत नहीं रहेगी।
JF-17 जेट की बढ़ रही है डिमांड?
पाकिस्तान और चीन की ओर से संयुक्त रूप से विकसित JF-17 थंडर एक सस्ता मल्टी-रोल फाइटर जेट है। ये पश्चिमी सप्लाई चेन से अलग ट्रेनिंग और मेंटेनेंस की सुविधा देता है। आसिफ के मुताबिक, मई के टकराव में इस जेट का प्रदर्शन देखकर कई देशों ने ऑर्डर दिए हैं।
बांग्लादेश ने हाल ही में JF-17 में रुचि दिखाई है। एक बांग्लादेशी रक्षा प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान के एयर चीफ से मुलाकात की और संभावित खरीद पर चर्चा की। इसके साथ ही, दोनों देशों के बीच 29 जनवरी से सीधी उड़ानें फिर शुरू होने वाली हैं, जो दस साल से ज्यादा समय बाद हो रहा है।
सऊदी अरब के साथ बड़ी डील की तैयारी?
सऊदी अरब भी पाकिस्तान के साथ JF-17 डील पर बातचीत कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी के करीब 2 बिलियन डॉलर के कर्ज को जेट डील में बदलने की चर्चा है। यह दोनों इस्लामिक देशों के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करेगा।
पिछले साल पाकिस्तान और सऊदी ने एक म्यूचुअल डिफेंस पैक्ट पर हस्ताक्षर किए थे। यह कदम पाकिस्तान की आर्थिक मुश्किलों और सऊदी की मिडिल ईस्ट में अमेरिकी प्रतिबद्धताओं पर अनिश्चितता के बीच उठाया गया है।
भारत ने गिराए JF-17 फाइटर जेट
ये पूरा दावा मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव से जुड़ा है। अप्रैल में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकियों ने पहलगाम में हमला किया, जिसमें 26 नागरिक मारे गए। भारत ने जवाब में ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया, जिसमें कई आतंकी कैंप और पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को तबाह किया गया।
भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने नवंबर में कहा था कि ऑपरेशन के दौरान कम से कम पांच पाकिस्तानी हाई-टेक फाइटर जेट्स को मार गिराया गया था। इसमें JF-17 भी शामिल था। आसिफ का दावा इसी संघर्ष को पाकिस्तान की \“सफलता\“ बताकर किया गया है।
पाकिस्तान की IMF पर क्यों है इतनी निर्भरता?
पाकिस्तान लंबे समय से अपनी कमजोर अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए IMF का सहारा लेता रहा है। सितंबर 2024 में IMF ने 7 बिलियन डॉलर का बेलआउट पैकेज मंजूर किया था उसके बाद मई 2025 में 1.4 बिलियन डॉलर का अलग से क्लाइमेट रेजिलिएंस फंड दिया था।
इन फंड से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को एक हद तक स्थिरता मिलती है। आसिफ का दावा ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान आर्थिक संकट से जूझ रहा है, लेकिन जेट ऑर्डर से उम्मीद जगी है।
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