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1957 से वोट दे रहे पद्मश्री बलबीर दत्त भी नहीं कर सके मतदान, रांची में सैकड़ों वोटर सूची से बाहर

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मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी, पद्मश्री बलबीर दत्त भी नहीं कर पाए मतदान।



जागरण संवाददाता, रांची। इस बार निर्वाचन आयोग ने जारी वोटर लिस्ट में एक ही परिवार को अलग-अलग बूथ पर नाम दे दिया था। घर एक, परिवार एक, वार्ड संख्या एक लेकिन मतदान केंद्र अलग-अलग। शहर के सैकड़ों परिवार निर्वाचन आयोग से परेशान दिखे।

पद्मश्री बलबीर दत्त ने बताया कि 1957 से मतदान करता आ रहा हूं। पहली बार हुआ कि वोट नहीं दे पाया। जिस बूथ पर मतदान करता आ रहा था, वहां नाम ही नहीं था। वहां के पीठासीन अधिकारियों ने बताया कि यहां से एक-दो किमी दूर बूथ केंद्र है, वहां देखिए।

थके-हारे परेशान 91 साल के पद्मश्री बलबीर दत्त ने भारी मन से घर लौट आए। उन्होंने कहा कि ओर मतदान के लिए प्रचार अभियान चलाया जाता है और दूसरी ओर इस तरह की परेशानियों से मतदाता जूझते हैं।

उन्होंने कहा कि लोकसभा-विधानसभा के चुनाव में वही बूथ पर, नगर निगम चुनाव में बदलने की क्या जरूरत थी? हालांकि अरगोड़ा के एक व्यक्ति का बूथ नामकुम के स्कूल में चला गया था।
मतदाता सूची में गड़बड़ी से हंगामा, सैकड़ों वोटर बिना मतदान लौटे

नगर निकाय चुनाव के दौरान राजधानी के कई मतदान केंद्रों पर मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर नाराजगी देखने को मिली। कई जगह नाम नहीं मिलने पर हंगामे की स्थिति बन गई। पहचान पत्र और आधार कार्ड लेकर पहुंचे अनेक मतदाताओं को सूची में नाम न होने के कारण निराश लौटना पड़ा।

कई मामलों में मतदाताओं के नाम एक वार्ड से हटाकर दूसरे वार्ड में जोड़ दिए गए, जबकि कई परिवारों के सदस्यों के नाम अलग-अलग बूथों में दर्ज मिले। पहली बार मतदान करने पहुंचे युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक को इस अव्यवस्था का सामना करना पड़ा।

बूथ परिवर्तन की पूर्व सूचना नहीं मिलने, ऑनलाइन जानकारी और वास्तविक सूची में अंतर तथा स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव से भ्रम की स्थिति बनी रही।

मतदाताओं ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि मतदान लोकतंत्र में भागीदारी का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन सूची की त्रुटियों के कारण वे अपने अधिकार का प्रयोग नहीं कर सके।
मतदाताओं की प्रतिक्रियाएं

  • सुमित कुमार ने कहा कि उन्होंने किसी तरह वोट दे दिया, लेकिन उनकी पत्नी का नाम सूची में नहीं मिला।
  • शशि कुमार नाम न मिलने से मतदान नहीं कर सके।
  • सूरज कुमार का नाम वार्ड 13 के बजाय वार्ड 46 में दर्ज मिला।
  • विरेंद्र शर्मा ने ऑनलाइन और वास्तविक सूची में अंतर की शिकायत की।
  • नीतिश कुमार घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी वोट नहीं दे सके।
  • अन्य मतदाताओं ने बूथ बदलाव की पूर्व सूचना और स्पष्ट दिशा-निर्देश की मांग की।


मतदाताओं ने सूची सुधार और सूचना व्यवस्था को अधिक पारदर्शी व सटीक बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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