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रेलवे बोर्ड ने दिया है साल में दो बार सेफ्टी शूज उपलब्ध कराने का दिशा-निर्देश। जागरण
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। निर्बाध ट्रेन संचालन को प्राथमिकता देने वाला रेलवे प्रशासन संरक्षा और सुरक्षा को लेकर खुद उदासीन बना हुआ है। पूर्वोत्तर रेलवे के ट्रैकमेंटेनर बिना सेफ्टी शूज के रेल लाइनों का रखरखाव कर रहे हैं। ट्रैकमेंटेनरों और वर्कशाप कर्मचारियों को आठ साल में सिर्फ एक बार सेफ्टी शूज मिला है। जबकि, रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को वर्ष 2018 से वर्ष में दो बार अनिवार्य रूप से सेफ्टी शूज उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया है।
रेलवे प्रशासन की उदासीनता को लेकर रेलकर्मियों में आक्रोश है। एनई रेलवे मजदूर यूनियन (नरमू) ने भी नाराजगी जताई है। यूनियन के अध्यक्ष केएल गुप्ता ने पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक को चिट्ठी लिखकर सेफ्टी शूज व सेफ्टी किट दिलाने की गुहार लगाई है।
नरमू के अध्यक्ष ने कहा है कि संरक्षा संवर्ग के कर्मचारियों को सेफ्टी शूज वर्ष में दो बार देने का प्रावधान वर्णित है। क्षेत्रीय रेलवे स्तर पर वर्ष 2018 से दिया जाना है। यूनियन के अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि पूर्वोत्तर रेलवे में आज तक मात्र एक बार ही सेफ्टी शूज दिया गया है।
वर्तमान में कर्मचारी ठंड में परेशान हैं। जो कर्मचारी रात्रि पेट्रोलिंग कर रहे हैं, सेफ्टी शूज नही होने से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अध्यक्ष ने महाप्रबंधक से मांग की है कि वे अपने स्तर से दिशा-निर्देश जारी करें। ताकि, संरक्षा से जुड़े कर्मचारियों को सेफ्टी शूज व संरक्षा किट उपलब्ध हो सके।
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उन्होंने अवगत कराया है कि ठंड के दिनों में खराब मौसम में ट्रैकमेंटेनर के पास सेफ्टी शूज के साथ टार्च होना अनिवार्य है। ठंड में पटरियां सिकुड़ने लगती हैं, ऐसे में रेल फ्रैक्चर के साथ रेल दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। लेकिन रेलवे प्रशासन बिना हथियार के टैकमेंटेनरों को मरम्मत व रखरखाव के लिए पटरियों पर उतार दिया है।
ट्रैकमेंटेनरों के पास न सेफ्टी शूज है और न संरक्षा किट। वे अपने खरीदे हुए शूज से किसी तरह काम चला रहे हैं, जो पटरियों पर चलने के कारण जल्द घिस व फट जा रहे हैं। यूनियन के अध्यक्ष ने रेलवे प्रशासन से रात्रि पेट्रोलिंग में दो-दो कर्मचारियों की ड्यूटी एक साथ लगाने की भी मांग की है। |
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