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गोरखपुर में गर्भवती की मौत मामले में जेके अस्पताल संचालक गिरफ्तार, नहीं थी कोई डिग्री

deltin33 2026-1-8 08:26:26 views 1077
  

बिना पंजीकरण के संचालित अस्पताल में प्रसव से पहले आरोपित ने लगाया था इंजेक्शन। सांकेतिक तस्वीर



जागरण संवाददाता, गोरखपुर। जेके हॉस्पिटल में गर्भवती की मौत के मामले में गुलरिहा पुलिस ने संचालक जावेद खान को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित के पास कोई डिग्री नहीं थी, बावजूद इसके रोगियों का उपचार करता था। पूछताछ के बाद पुलिस ने आरोपित संचालक को न्यायालय में पेश कर बुधवार को जेल भेज दिया। इसने प्रसव के पहले महिला को इंजेक्शन लगाया था, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई, फिर महिला को गाड़ी से मेडिकल कालेज गेट पर छोड़कर फरार हो गया।

गुलरिहा पुलिस ने महिला के पति की तहरीर पर दर्ज मुकदमे में गैर इरादतन हत्या की धारा के साथ जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र और अपंजीकृत व्यक्ति द्वारा चिकित्सा प्रैक्टिस करने की धाराएं भी बढ़ा दी हैं। मामले में नामजद अन्य फरार आरोपितों की तलाश की जा रही है।

परसौना निवासी रामचंद्र की 24 वर्षीय पुत्री रीतू की शादी महराजगंज के श्यामदेउरवां थाना के लखिमा गांव निवासी सुनील से हुई थी। रीतू गर्भवती थी और प्रसव के लिए मायके में रह रही थी। तीन जनवरी की सुबह प्रसव पीड़ा होने पर स्वजन उसे तरकुलहा चौराहे पर स्थित जेके हास्पिटल लेकर पहुंचे। महिला के पति सुनील के अनुसार हास्पिटल कर्मचारी ने प्रसव के लिए 40 हजार रुपये की मांग की, जिसे उन्होंने जमा कर दिया।

इसके बावजूद दोपहर में रीतू की हालत बिगड़ने लगी। छोटी बहन विमला के अनुसार अस्पताल संचालकों की लापरवाही के कारण उसकी बहन की मौत हो गई। घटना के बाद अस्पताल संचालक बिना किसी को सूचना दिए अपनी कार से गर्भवती को लेकर मेडिकल कालेज पहुंचे और गेट पर उतार कर फरार हो गए।

मेडिकल कालेज में चिकित्सकों ने जांच के बाद रीतू को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद स्वजन शव लेकर दोबारा जेके हास्पिटल पहुंचे, जहां अस्पताल खुला मिला, लेकिन न तो संचालक मौजूद थे और न ही कोई कर्मचारी। घटना से आक्रोशित स्वजन शाम साढ़े पांच बजे से शव रखकर अस्पताल संचालक और कर्मचारी की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे।

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मौके पर पहुंची पुलिस ने स्वजन को शांत कराया। इसके बाद पति सुनील की तहरीर पर कथित डा. जावेद खान, उसके भाई इम्तियाज, एक महिला डा. और अन्य कर्मचारी के विरुद्ध केस दर्ज किया था।

थाना प्रभारी विजय प्रताप सिंह ने बताया कि आरोपित संचालक को जंगल माघी नहर के पास से आयुष विश्वविद्यालय चौकी प्रभारी ने गिरफ्तार किया। पूछताछ और जांच में उसके पास डाक्टर की कोई डिग्री नहीं मिली। वह फर्जी तरीके से लोगों का उपचार करता था। जेल भेजने के बाद इसके भाई समेत अन्य की तलाश चल रही है।
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