राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत जारी हुई ड्राफ्ट मतदाता सूची के बाद विपक्ष, निर्वाचन आयोग और भाजपा, दोनों पर हमलावर है। विरोधियों ने मतदाता सूची से 2.89 करोड़ नाम कटने को राजनीतिक साजिश और लोकतंत्र की हत्या करार दिया है।
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग की साख दांव पर होने की बात कही है और अपने कार्यकर्ताओं को भाजपा की चालाकी से सावधान रहकर एसआईआर में काम करने के निर्देश दिए हैं। वहीं कांग्रेस ने प्रक्रिया की जांच की मांग उठाई है।
सपा प्रमुख ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता पूरी निष्ठा और गंभीरता से एसआईआर में मदद करें। भाजपा की चालाकी से सतर्क रहना है। वर्ष 2026 की मेहनत से वर्ष 2027 में सफलता मिलेगी।
इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा कोई चाल काम नहीं करेगी। सपा की बढ़ती ताकत से भाजपा घबराई हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि ग्राम पंचायत और विधानसभा-लोकसभा में मतदाताओं की संख्या में अंतर क्यों है?
कांग्रेस सांसद एवं राज्यसभा में उपनेता प्रतिपक्ष प्रमोद तिवारी ने कहा है कि भाजपा मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की साजिश कर रही है। जिनके नाम काटे गए हैं, उनमें तमाम मजदूर, पिछड़े, दलित, गरीब या फिर अल्पसंख्यक फेरी आदि लगाने वाले लोग हैं, जो रोजी-रोटी के सिलसिले में बाहर गए हैं और समय से आकर फार्म नहीं भर सके।
उनको पर्याप्त समय न देकर लोकतंत्र का गला घोंटा गया है। वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि यूपी एसआईआर ड्राफ्ट मतदाता सूची से इतनी बड़ी संख्या में मतदाता हटाना बड़ी साजिश है। इसकी जांच होनी चाहिए।
दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी व राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने आरोप लगाया है कि उप्र में एसआईआर के नाम पर मतदाताओं के नाम काटना लोकतंत्र पर अब तक का सबसे बड़ा हमला है। चुनाव आयोग और भाजपा ने मिलकर गरीब, दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और मजदूर वर्ग को मताधिकार से वंचित करने की साजिश रची है। |