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एमजीएम मेडिकल कॉलेज।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर । महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम निर्णय लिया गया है। पहली बार अस्पताल में हास्पिटल मैनेजमेंट कमेटी का गठन किया जाएगा, जो इलाज, संसाधनों और मरीज सुविधाओं पर सामूहिक नियंत्रण और नियमित निगरानी करेगी।
इसके साथ ही एमजीएम परिसर में निर्माणाधीन सेंट्रल पैथोलाजी लैब में जांच दरें तय करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी, जिससे मरीजों को महंगी जांचों से राहत मिल सकेगी।
यह पहल स्वास्थ्य विभाग की हालिया राज्यस्तरीय बैठक के बाद सामने आई है। पांच जनवरी को रांची के सदर अस्पताल में आयोजित बैठक में एमजीएम के अधीक्षक डा. बलराम झा ने भाग लिया था। बैठक में सदर अस्पताल की हास्पिटल मैनेजमेंट कमेटी के मॉडल को प्रस्तुत किया गया, जहां इस व्यवस्था के तहत अस्पताल संचालन, संसाधनों के उपयोग और मरीजों को दी जाने वाली सुविधाओं पर नियमित और प्रभावी निगरानी की जा रही है। इसी मॉडल को अब एमजीएम में लागू करने का निर्णय लिया गया है।
वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में बनी रूपरेखा
बुधवार को एमजीएम के वर्तमान प्रिंसिपल डा. दिवाकर हांसदा, भावी प्रिंसिपल डा. संजय कुमार और अधीक्षक डा. बलराम झा के बीच इस विषय को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में हास्पिटल मैनेजमेंट कमेटी की संरचना, अधिकार और कार्यप्रणाली पर विस्तृत चर्चा की गई।
प्रिंसिपल डा. दिवाकर हांसदा ने बताया कि कमेटी में जिला प्रशासन का एक अधिकारी, एमजीएम के प्रिंसिपल, अधीक्षक और वरिष्ठ चिकित्सक शामिल होंगे।
नियमित बैठकों में होगी अस्पताल व्यवस्था की समीक्षा
हास्पिटल मैनेजमेंट कमेटी निर्धारित अंतराल पर बैठक कर अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं, जांच सुविधाओं, दवाओं की उपलब्धता, साफ-सफाई, मानव संसाधन और मरीजों की शिकायतों की समीक्षा करेगी। समस्याओं के समाधान के लिए मौके पर ही निर्णय लिए जाएंगे, जिससे अनावश्यक देरी से बचा जा सके। इस व्यवस्था से अस्पताल प्रशासन में जवाबदेही भी तय होगी और सेवा गुणवत्ता में सुधार आएगा।
सेंट्रल पैथोलाजी लैब अंतिम चरण में
एमजीएम परिसर में निर्माणाधीन सेंट्रल पैथोलाजी लैब लगभग अंतिम चरण में है। इसके शुरू होने के बाद एक ही स्थान पर छोटी-बड़ी सभी तरह की पैथोलाजिकल जांच संभव हो सकेंगी। वर्तमान में कई जांचों के लिए मरीजों को निजी लैबों पर निर्भर रहना पड़ता है, जहां जांच का खर्च अपेक्षाकृत अधिक होता है।
सीजीएचएस दरों पर तय होंगी जांच फीस
अस्पताल प्रशासन सेंट्रल पैथोलाजी लैब में कुछ महंगी जांचों की दरें सीजीएचएस (केंद्रीय स्वास्थ्य योजना) की दरों पर तय करने की तैयारी कर रहा है। ये दरें निजी लैबों की तुलना में कम होती हैं। जांच शुल्क तय करने का उद्देश्य लैब को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है, ताकि यह 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन सुचारू रूप से संचालित हो सके।
गरीब मरीजों को मिलेगी सीधी राहत
प्रिंसिपल डा. दिवाकर हांसदा ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना और लाल कार्डधारी मरीजों के लिए सेंट्रल पैथोलाजी लैब की जांच पूरी तरह निश्शुल्क होगी। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा और उन्हें महंगी निजी जांच कराने की मजबूरी नहीं रहेगी।
एमजीएम में हास्पिटल मैनेजमेंट कमेटी का गठन और सेंट्रल पैथोलाजी लैब में जांच दरों का निर्धारण, दोनों कदम मिलकर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक व्यवस्थित, सुलभ और मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। |
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