शेयर बाजार पर सबसे बड़ी भविष्यवाणी: 2026 में 93918 पर पहुंच सकता है सेंसेक्स, दिखेगी 11% की तेजी; किसने किया दावा?
एजेंसी, नई दिल्ली| वैश्विक अनिश्चितताओं और शेयर बाजार के ऊंचे मूल्यांकन के बावजूद सेंसेक्स के लिए लंबी अवधि का आउटलुक सकारात्मक बताया गया है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स वर्ष 2026 के अंत तक 93,918 अंक तक पहुंच सकता है, जो मौजूदा स्तर से करीब 11 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है।
यह अनुमान क्लाइंट एसोसिएट्स (Client Associates) की वार्षिक इक्विटी आकलन रिपोर्ट में दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, सेंसेक्स दिसंबर 2026 तक अपने वर्तमान स्तर 84,805 से ऊपर चढ़ते हुए 93,918 तक पहुंच सकता है। कंपनी का मानना है कि बाजार में उतार-चढ़ाव भले बना रहे, लेकिन भारत की घरेलू आर्थिक मजबूती लंबी अवधि में बाजार को सहारा देगी।
सोना-चांदी में बढ़ा लोगों का भरोसा
रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा अस्थिर बाजार माहौल में सोना और चांदी निवेश पोर्टफोलियो (Gold-Silver Investment) के लिए अहम संतुलनकारी संपत्ति बनकर उभरे हैं। क्लाइंट एसोसिएट्स, जो अमीर और बेहद अमीर निवेशकों के लिए 7 अरब डॉलर से अधिक की संपत्ति का प्रबंधन करती है, का कहना है कि 2025 में कीमती धातुओं का प्रदर्शन मजबूत रहा।
कंपनी के मुताबिक, कमजोर डॉलर, भू-राजनीतिक तनाव और मौद्रिक नीतियों में बदलाव के चलते सोने की मांग में तेज बढ़ोतरी हुई। खासतौर पर केंद्रीय बैंकों की खरीद से सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की भूमिका और मजबूत हुई। वहीं, वैश्विक सप्लाई से जुड़ी चिंताओं और अमेरिका-चीन तनाव के कारण चांदी की कीमतों में भी बीते साल तेज उछाल देखने को मिला।
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घरेलू आर्थिक स्थिति में बेहतर आय का अनुमान
2026 के लिए बाजार रणनीति पर बात करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाला साल व्यापक तेजी के बजाय चुनिंदा सेक्टरों और मजबूत बुनियादी कारकों पर आधारित अवसरों का हो सकता है।
क्लाइंट एसोसिएट्स के निवेश अनुसंधान प्रमुख नितिन अग्रवाल ने कहा कि, “भारत की घरेलू आर्थिक स्थिति और बेहतर आय अनुमान सकारात्मक संकेत देते हैं, लेकिन ऊंचे मूल्यांकन और वैश्विक जोखिमों को देखते हुए निवेशकों को संतुलित और अनुशासित रणनीति अपनानी चाहिए।“
रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.8% से बढ़कर 7.4% रहने (India GDP Growth) का अनुमान जताया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि लंबी अवधि में संपत्ति निर्माण के लिए इक्विटी अहम बनी रहेगी, लेकिन इसके साथ जोखिम प्रबंधन और विविधीकरण पर खास ध्यान देना जरूरी होगा। |