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जमीन की खरीद-विक्री और दाखिल- खरिज कराना चाहते हैं तो जान लें यह जरूरी नियम...अपग्रेड हो रहा झारभूमि साफ्टवेयर

LHC0088 2026-1-7 18:56:38 views 315
  

जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद अब दाखिल-खारिज के लिए दोबारा आवेदन नहीं किया जा सकेगा।



संवाद सहयोगी, मेदिनीनगर (पलामू)। जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद अब दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के लिए दोबारा आवेदन नहीं किया जा सकेगा। यदि कोई प्रज्ञा केंद्र या साइबर कैफे से म्यूटेशन का आवेदन करने का प्रयास करेगा तो झारभूमि साइट पर मौजा, प्लॉट या खाता नंबर डालने के बाद आवेदन स्वीकृत ही नहीं होगा।

इसका कारण यह है कि राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ऑनलाइन दाखिल-खारिज की व्यवस्था में बड़े बदलाव करने जा रहा है।
विभाग झारभूमि सॉफ्टवेयर को अपग्रेड कर रहा है, जिसमें रैयतों की सुविधा के लिए पांच बिंदुओं पर विशेष फोकस किया गया है।

रजिस्ट्री के साथ ही राष्ट्रीय सामान्य दस्तावेज पंजीकरण प्रणाली (एनजीडीआरएस) के माध्यम से सभी दस्तावेज स्वतः अंचलाधिकारी के लॉगइन में पहुंच जाते हैं।

इसके बावजूद जमीन खरीदार द्वारा दोबारा म्यूटेशन आवेदन करने से आवेदन की पुनरावृत्ति हो जाती है। इससे अंचलाधिकारी को एनजीडीआरएस से आए दस्तावेजों को अलग से खोजकर दोबारा आवेदन को निरस्त करना पड़ता है, जिससे समय की बर्बादी होती है।

सॉफ्टवेयर अपग्रेड होने के बाद यह समस्या समाप्त हो जाएगी। इससे न सिर्फ अधिकारियों को राहत मिलेगी, बल्कि रैयतों को भी सुविधा होगी। नई व्यवस्था दो से तीन महीने में लागू होने की संभावना है।
दोबारा आवेदन पर रोक से विभाग को होगा लाभ

राजस्व विभाग का कहना है कि म्यूटेशन के रिपीट आवेदन से झारभूमि साइट पर अतिरिक्त दबाव रहता है। विभागीय आंकड़ों में स्वीकृत मामलों की तुलना में निरस्त म्यूटेशन अधिक दिखते हैं, जिससे विभाग की छवि प्रभावित होती है।

नई व्यवस्था से अंचलाधिकारियों का समय बचेगा। अब सीओ से म्यूटेशन रिजेक्ट हुआ तो अपील जरूरी नई व्यवस्था में यदि दाखिल-खारिज का मामला अंचलाधिकारी द्वारा निरस्त कर दिया गया, तो दोबारा आवेदन नहीं किया जा सकेगा।

ऐसे मामलों में भूमि सुधार उप समाहर्ता (डीसीएलआर) के पास अपील करनी होगी। डीसीएलआर की स्वीकृति के बाद ही म्यूटेशन किया जाएगा। फायदा: इससे अंचलाधिकारी म्यूटेशन रद करने से पहले अधिक सतर्क रहेंगे। निरस्तीकरण के मामलों में कमी आएगी और जमीन खरीदारों को लाभ मिलेगा।
2008 से पहले के डीड पर म्यूटेशन पर लगेगी रोक

विभाग 2008 से पहले के डीड के आधार पर दाखिल-खारिज पर पाबंदी लगाने जा रहा है। नए सॉफ्टवेयर में ऐसे डीड के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा नहीं होगी। इसके लिए संबंधित विभाग से पूर्व स्वीकृति लेनी होगी।

इसका फायदा यह होगा कि पुराने दस्तावेजों के आधार पर गलत तरीके से जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगेगी और सरकारी जमीन की अवैध हेराफेरी पर अंकुश लगेगा।
पड़ोसी रैयत भी दर्ज करा सकेंगे ऑनलाइन आपत्ति

झारभूमि सॉफ्टवेयर अपग्रेड होने के बाद म्यूटेशन मामलों में संबंधित जमीन के पड़ोसी रैयत भी ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। वे यह बता सकेंगे कि आवेदन में क्या त्रुटि है या कौन से गलत दस्तावेज लगाए गए हैं। पहले यह अधिकार सिर्फ हल्का कर्मचारी के पास था।

अब अंचलाधिकारी को पड़ोसी रैयतों की आपत्तियों का भी निराकरण करना होगा। इससे जमीन खरीदारों को आपत्तियों की जानकारी समय पर मिल सकेगी।
सीओ के लॉगइन में त्रुटि सुधार का भी मिलेगा विकल्प

फिलहाल एनजीडीआरएस से झारभूमि साइट पर दस्तावेज आने के बाद त्रुटियों में सुधार का विकल्प अंचलाधिकारी के पास नहीं होता। सॉफ्टवेयर अपग्रेड के बाद सीओ को त्रुटियां सुधारने का अधिकार मिलेगा।

इससे छोटी-छोटी तकनीकी गलतियों के कारण म्यूटेशन निरस्त होने की संख्या में कमी आएगी और रैयतों को राहत मिलेगी।
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