प्रतीकात्मक चित्र
जागरण संवाददाता, चित्रकूट। कोषागार में 43.13 करोड़ रुपये के घोटाले में मंगलवार को पुलिस ने राजापुर के अतरसुई निवासी दलाल अजय सिंह यादव को उसके घर से गिरफ्तार किया है। आरोप है कि अजय और उसके भाई अजीत सिंह यादव ने करीब आधा दर्जन से अधिक पेंशनरों के खातों में तीन से चार करोड़ रुपये का अनियमित भुगतान कराया है। इन दोनों ने अपने बैंक अकाउंट में पेंशनरों से हिस्से के तौर पर करीब 50 लाख रुपये आनलाइन ट्रांजेक्शन कराया है।
उधर, एसआइटी ने मंगलवार को पूर्व वरिष्ठ कोषाधिकारी शैलेश कुमार के साथ प्रभारी एटीओ राजबहादुर और पटल सहायक योगेंद्र सिंह से पूछताछ की। मृत पेंशनरों की फाइलों और बैंक खाता नंबर बदलने आदि बिंदुओं पर तीनों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई। शैलेश कुमार वर्तमान में बरेली में मुख्य कोषाधिकारी पद पर कार्यरत हैं।
एसआइटी प्रभारी सीओ सिटी अरविंद कुमार वर्मा ने बताया कि कोषागार घोटाले में दलाल अजय सिंह यादव और उसके भाई अजीत सिंह यादव का नाम सामने आया था। सीओ राजापुर राजकमल की अगुवाई में प्रभारी निरीक्षक लाखन सिंह व पहाड़ी थानाध्यक्ष प्रवीण सिंह ने आवास पर छापा मार कर बोलेरो से भागते समय अजय को गिरफ्तार कर लिया, जबकि अजीत भाग निकला।
बोलेरो को कोई कागज न मिलने पर सीज कर दिया गया है। जल्द ही अन्य बिचौलियों और दलालों को भी पकड़ा जाएगा। अजय को मिलाकर अब तक 33 आरोपित जेलभेजेजाचुकेहैं, जिसमेंदोकोषागारकर्मी, 24 पेंशनरऔरसात बिचौलिया व दलाल हैं। मंगलवार को शैलेश कुमार भी बरेली से चित्रकूट पहुंचे। उनके कार्यकाल में लगभग 10-15 करोड़ रुपये का गबन हुआ था।
इस दौरान 93 पेंशनरों के खातों में फर्जी भुगतान के आदेश जारी किए गए थे। जांच अधिकारियों ने मृत पेंशनरों की फाइलों को दोबारा चालू करने, खाता नंबर बदलने और अन्य अनियमितताओंपरकरीबतीन घंटे तक सवाल किए। इस दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य जुटाए गए, जिनसे जांच में मदद मिलने की संभावना है।
हालांकि, पूछताछ के दौरान तीनों अधिकारी खुद को निर्दोष बताने के साथ एक-दूसरे पर दोष मढ़ते रहे। लेखाकार कंप्यूटर राजेश भारती पारिवारिक कारणों से उपस्थित नहीं हो पाए। एसआइटी मौजूदा वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह और पूर्व वरिष्ठ कोषाधिकारी कमलेश कुमार से पहले पूछताछ कर चुकी है।
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