अटल अयूब नगर में नाले के बीच से गुजरती पेयजल पाइप लाइन।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। इंदौर में दूषित पेयजल से 18 लोगों की मौत के बाद भोपाल में भी हड़कंप मचा है। वजह साफ है—दोनों शहरों का वाटर डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम लगभग एक जैसा है। इसी आशंका के बीच दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन नईदुनिया की टीम ने मंगलवार को भोपाल के 10 इलाकों का दौरा कर पानी के नमूने जुटाए और टीडीएस जांच कराई। रिपोर्ट में अधिकांश क्षेत्रों में टीडीएस मानक के भीतर मिला, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि असली खतरा टीडीएस नहीं, बल्कि वह बैक्टीरिया है, जिसकी जांच रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। साफ दिखने वाला पानी भी जानलेवा संक्रमण फैला सकता है।
400 किलोमीटर का ‘डेथ नेटवर्क’
भोपाल के 22 वार्डों में करीब 400 किलोमीटर लंबी पेयजल पाइपलाइनें सीवेज लाइनों के साथ-साथ बिछी हैं। नवीबाग और गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र जैसे घनी आबादी वाले इलाकों की करीब 5 लाख की आबादी रोज इसी जोखिम भरे पानी पर निर्भर है। ये लोहे की पाइपलाइनें 20 साल से ज्यादा पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं। शहर के 2.71 लाख नल कनेक्शनों में से लगभग 75 हजार ऐसे हैं, जिन्हें तत्काल बदलने की जरूरत है—वरना किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
कुएं में घुस रहा सीवेज, प्रशासन बेखबर
खानूगांव क्षेत्र की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। यहां पार्षद रेहाना सुल्तान ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें सीवेज का गंदा पानी सीधे कुएं में गिरता दिख रहा है। पार्षद प्रतिनिधि मो. जहीर के अनुसार, 15 दिन पहले लिखित शिकायत देने के बावजूद प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की—मानो कुंभकर्णी नींद में हो।
दिखावटी सुधार, सियासी उबाल
शहर की चरमराती जल व्यवस्था पर सियासत भी गरमा गई है। मंगलवार को कांग्रेस पार्षदों ने फिल्टर प्लांटों का घेराव किया। बरखेड़ा पठानी में गंदगी और श्यामला हिल्स में रॉ-वाटर के सीधे बड़े तालाब में मिलने पर कांग्रेस ने आंदोलन की चेतावनी दी है। उधर, दबाव बढ़ते ही महापौर मालती राय ने आईएसबीटी कार्यालय में आनन-फानन में समीक्षा बैठक बुलाई और इंजीनियरों को सख्त निर्देश दिए कि सीवेज और पेयजल का मेल किसी भी सूरत में न हो। हालांकि, जर्जर पाइपलाइनों के जाल को देखते हुए ये निर्देश फिलहाल कागजी ही नजर आ रहे हैं।
टीडीएस रेंज (पीपीएम ) --स्थिति -- फायदे और नुकसान
50 से कम - अस्वीकार्य - इसमें खनिज नहीं होते। यह कड़वा लग सकता है और शरीर से मिनरल्स खींच सकता है। (आरओ का पानी अक्सर इतना कम होता है, जो ठीक नहीं है)।
50 - 150 - स्वीकार्य - अक्सर आरओ प्यूरीफायर का पानी इसी रेंज में होता है।
150 - 300 - सर्वोत्तम - यह रेंज सबसे अच्छी है। इसमें जरूरी मिनरल्स भी होते हैं और स्वाद भी अच्छा होता है।
300 - 500 - ठीक - पीने योग्य है, लेकिन स्वाद थोड़ा भारी हो सकता है।
500 - 1200 - खराब - पानी खारा लगेगा, किडनी स्टोन का खतरा बढ़ सकता है।
1200 से ऊपर - पीने योग्य नहीं - यह पानी पीने के लायक नहीं है।
इन क्षेत्रों के पानी की कराई टीडीएस जांच
स्थान - स्त्रोत - टीडीएस
अयोध्या नगर - नर्मदाजल - 134.0
अशोका गार्डन - बोरवेल - 554.0
कटारा हिल्स - बोरवेल - 421.1
करोंद - बोरवेल - 655.9
दुर्गा नगर - नर्मदाजल - 163.6
एमपी नगर जोन 1 - नर्मदाजल - 137.8
कोलार - केरवा - 142.7
शाहपुरा - कोलार - 133.0
नवजीवन छोला - बड़ा तालाब - 155.5
प्रेम नगर यूनियन कार्बाइड - बड़ा तालाब - 156.8
तलैया - बड़ा तालाब - 151.5 |
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