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MP में जल्द दौड़ेगी ‘सहकार टैक्सी’, ओला-उबर को मिलेगी चुनौती, ड्राइवर की बढ़ेगी आमदनी

deltin33 2026-1-20 18:57:35 views 825
  

टैक्सी सेवा (प्रतीकात्मक चित्र)



डिजिटल डेस्क, भोपाल। शहरी क्षेत्रों में आम नागरिकों को सस्ती, भरोसेमंद और सुगम परिवहन सुविधा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार सहकारिता मॉडल पर ‘सहकार टैक्सी सेवा’ शुरू करने की तैयारी कर रही है। इस सेवा का पूरा संचालन सहकारी समितियों के माध्यम से किया जाएगा, जिससे न केवल समितियों की आय बढ़ेगी बल्कि इससे जुड़ने वाले ड्राइवरों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
बिना कमीशन बढ़ेगी ड्राइवरों की आमदनी

इस नई टैक्सी सेवा की खास बात यह होगी कि इसमें निजी एग्रीगेटर कंपनियों जैसे ओला और उबर की तरह 20 से 25 प्रतिशत तक का कमीशन नहीं लिया जाएगा। इससे ड्राइवरों की आमदनी बढ़ेगी और यात्रियों को भी कम किराये पर टैक्सी सुविधा मिल सकेगी। सहकार टैक्सी का बुकिंग मॉडल मौजूदा एग्रीगेटर एप्स की तरह ही होगा, जहां बुकिंग मिलते ही पंजीकृत ड्राइवर को सूचना पहुंच जाएगी।
केंद्रीय घोषणा के बाद प्रदेश में तैयारी तेज

केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा सहकार टैक्सी सेवा की घोषणा के बाद दिल्ली और गुजरात में इसके पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जा चुके हैं। अब मध्यप्रदेश का सहकारिता विभाग भी इस दिशा में तेजी से तैयारी कर रहा है। संभावना जताई जा रही है कि आगामी बजट में इस योजना की औपचारिक घोषणा की जा सकती है।
प्राथमिक समितियों को मिलेगा संचालन का जिम्मा

अधिकारियों के अनुसार, सहकार टैक्सी सेवा का संचालन प्राथमिक सहकारी समितियों के हाथ में रहेगा। राज्य स्तर पर एक महासंघ गठित किया जाएगा, जिसमें ड्राइवर पंजीयन कर सकेंगे। एप निर्माण, संचालन और तकनीकी खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
सहकारिता मंत्री ने बताईं संभावनाएं

प्रदेश के सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि सहकारिता के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। समितियों को उद्योगों से जोड़ने के साथ-साथ नए-नए क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। सहकार टैक्सी सेवा भी इसी दिशा में एक अहम कदम है।

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बड़े शहरों से होगी शुरुआत

सूत्रों के मुताबिक, योजना की शुरुआत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन जैसे बड़े शहरों से की जाएगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इसे अन्य शहरों तक विस्तार दिया जाएगा। यदि कोई सहकारी समिति स्वयं वाहन खरीदकर टैक्सी सेवा का संचालन करना चाहती है, तो सरकार की गारंटी पर बैंक ऋण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। यह ठीक वैसा ही होगा जैसे आदिवासी क्षेत्रों में उचित मूल्य की दुकान से राशन पहुंचाने के लिए सरकार ने अपनी गारंटी पर ऋण दिलाकर वाहन खरीदवाए हैं।
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